बचे हुए डेटा को बर्बाद होते देख होता है दुख? राघव चड्ढा ने सदन में पेश किए समाधान

Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने राज्यसभा में टेलिकॉम प्लान्स में रोजाना डेटा एक्सपायर की समस्या उजागर की है. उन्होंने सुझाव दिया कि बचा हुआ डेटा रोलओवर, अगले महीने एडजस्ट या दोस्तों को ट्रांसफर किया जा सके. उनका मानना है कि यूजर्स को अपनी खरीदी हुई डेटा की पूरी वैल्यू मिलनी चाहिए.

राज्यसभा सदस्य और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवक्ता, राघव चड्ढा ने 23 मार्च को सदन में एक अहम मुद्दा उठाया है. मुद्दा है भारत में टेलिकॉम कंपनियों द्वारा लागू किए गए डेली डेटा एक्सपायर का. अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राघव चड्ढा ने बताया कि आजकल ज्यादातर बड़े टेल्को के रिचार्ज प्लान में रोजाना 1.5 से 3 GB तक का डेटा लिमिट होता है, जो हर 24 घंटे में रीसेट हो जाता है. और सबसे बड़ी बात यह है कि अगर आप पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं करते, तो वह रोलओवर या रिफंड नहीं होता. राघव ने इस सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाते हुए यह भी सुझाव दिया कि इसे यूजर-फ्रेंडली बनाने का तरीका क्या हो सकता है. आइए जानते हैं उनके सुझाए समाधान के बारे में.

पोस्ट में क्या कहा राघव चड्ढा ने?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने बताया कि आजकल के टेलीकॉम प्लान्स में रोजाना डेटा लिमिट होती है, जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB, और यह हर 24 घंटे में रीसेट हो जाती है. उन्होंने कहा कि जो डेटा इस्तेमाल नहीं किया जाता, वह मिडनाइट होते ही खत्म हो जाता है, भले ही पूरा पैक पहले ही भुगतान किया गया हो.

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने 2GB का प्लान लिया और सिर्फ 1.5GB इस्तेमाल किया, तो बाकी 0.5GB गायब हो जाता है. इसके लिए कोई रिफंड या रोलओवर नहीं मिलता. यह उनकी व्याख्या के अनुसार प्लान की पॉलिसी है. उनका मानना है कि डेटा का पूरा इस्तेमाल करना जरूरी है, वरना मिडनाइट के बाद वह हमेशा के लिए खो जाता है. यही आज के मोबाइल डेटा का सच है.

बचे हुए डेटा का इस्तेमाल करने के लिए समाधान क्या हैं?

सभी यूजर्स के लिए डेटा कैरी-फॉरवर्ड/ डेटा रोलओवर हो जाए

सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को इस्तेमाल न किए गए डेटा का रोलओवर देने की सुविधा देनी चाहिए. इसका मतलब है कि दिन के अंत में जो डेटा बचा रह गया है, उसे अगले दिन की दैनिक डेटा लिमिट में जोड़ दिया जाना चाहिए, न कि जैसे ही उसकी वैधता खत्म हो जाए, उसे मिटा दिया जाए.

अगले महीने के रीचार्ज में बचा डाटा एडजस्ट करने का ऑप्शन दिया जाए

अगर कोई यूजर लगातार अपने डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर रहा है, तो यह होना चाहिए कि उस बची हुई डेटा वैल्यू का अगली महीने के रीचार्ज अमाउंट में समायोजन या डिस्काउंट किया जा सके. यूजर्स को बार-बार उस कैपेसिटी के लिए भुगतान नहीं करना चाहिए, जिसका वे इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं.

बचे हुए डेटा को रिश्तेदारों और दोस्तों को ट्रांसफर करने की सुविधा दी जाए

बचा हुआ डेटा यूजर की डिजिटल संपत्ति के रूप में माना जाना चाहिए. यूजर्स को यह अधिकार होना चाहिए कि वे अपने दैनिक डेटा लिमिट से बचे हुए डेटा को दूसरों को ट्रांसफर कर सकें, बिलकुल उसी तरह जैसे वे दूसरों को पैसे ट्रांसफर करते हैं.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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