Paytm Fastag: क्या आपके भी पास है पेटीएम का फास्टैग? पढ़ लें यह जरूरी खबर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम की इकाई पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड उत्पाद, वॉलेट व फास्टैग में 29 फरवरी 2024 के बाद जमा या टॉप-अप स्वीकार न करने का 31 जनवरी को निर्देश दिया था.

Paytm Crisis : पेटीएम के फास्टैग यूजर्स यूजर्स के लिए बड़ी और जरूरी खबर है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से रोड टोलिंग अथॉरिटी भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने फास्टैग यूजर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है. एनएचएआई ने अलर्ट जारी कर लेागों से अधिकृत बैंकों से फास्टैग खरीदने का आग्रह किया है. पेटीएम फास्टैग यूजर्स को नया फास्टैग लेना होगा.

फास्टैग जारी करने के लिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक अब अधिकृत नहीं है. आईएचएमसीएल ने उन 32 बैंकों की सूची जारी की है, जहां से यूजर्स अपने लिए फास्टैग खरीद सकते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की टोल संग्रहण इकाई भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को परेशानी से बचने के लिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक के अलावा 32 अधिकृत बैंकों से फास्टैग सेवाएं लेने की सलाह दी है.

आईएचएमसीएल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, अपना फास्टैग 32 अधिकृत बैंकों से खरीदें. इन 32 अधिकृत बैंकों में एयरटेल पेमेंट्स बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक शामिल हैं.

एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि भारत में आठ करोड़ से अधिक फास्टैग उपयोगकर्ता हैं और पेटीएम पेमेंट्स बैंक (पीपीबीएल) की बाजार हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है. इससे पहले, आईएचएमसीएल ने 19 जनवरी 2024 को लिखे एक पत्र में पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नये फास्टैग जारी करने से रोक दिया था.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम की इकाई पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड उत्पाद, वॉलेट व फास्टैग में 29 फरवरी 2024 के बाद जमा या टॉप-अप स्वीकार न करने का 31 जनवरी को निर्देश दिया था. हालांकि, कोई भी ब्याज, कैशबैक या रिफंड ग्राहकों के खातों में किसी भी समय वापस जमा किया जा सकता है.

केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा था कि निर्देश लगातार निरंतर गैर-अनुपालन के बाद दिए गए. आईएचएमसीएल ने कहा कि वह फास्टैग उपयोगकर्ताओं को आरबीआई दिशानिर्देशों के तहत नवीनतम फास्टैग केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, त्रिशूर जिला सहकारी बैंक, साउथ इंडियन बैंक, सारस्वत बैंक, नागपुर नागरिक सहकारी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, करूर व्यास्य बैंक, जेएंडके बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, फिनो बैंक, इक्विटेबल स्मॉल फाइनेंस बैंक, कॉसमॉस बैंक, सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एक्सिस बैंक फास्टैग सेवा प्रदान करने के लिए अधिकृत अन्य बैंक हैं.

रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) प्रौद्योगिकी से लैस फास्टैग, उपयोगकर्ताओं को सीधे लिंक किये गए बैंक खातों से राजमार्ग टोल शुल्क का भुगतान करने की सेवा प्रदान करता है.

पेटीएम फास्टैग उपयोगकर्ताओं के लिए क्या नई जानकारी आई है?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने घोषणा की है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक अब फास्टैग जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है। यूजर्स को 32 अधिकृत बैंकों से नया फास्टैग खरीदने की सलाह दी गई है.

फास्टैग खरीदने के लिए कौन से बैंक अधिकृत हैं?

फास्टैग खरीदने के लिए एयरटेल पेमेंट्स बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, और अन्य 28 बैंक शामिल हैं.

यह निर्णय क्यों लिया गया है?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश के कारण पेटीएम पेमेंट्स बैंक को फास्टैग जारी करने से रोक दिया गया था, जो कि लगातार गैर-अनुपालन के कारण हुआ.

उपयोगकर्ताओं को क्या करने की सलाह दी गई है?

उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने फास्टैग को किसी भी एक अधिकृत बैंक से खरीदें और आरबीआई के नवीनतम केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया को पूरा करें.

फास्टैग का उपयोग कैसे किया जाता है?

फास्टैग रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है, जो उपयोगकर्ताओं को सीधे लिंक किए गए बैंक खातों से राजमार्ग टोल शुल्क का भुगतान करने की सुविधा देता है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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