iQOO ने एक साथ अपने 3 स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. Vivo के इस सब-ब्रांड ने भारत में अपने ऑनलाइन स्टोर को अपडेट करते हुए फ्लैगशिप iQOO 15, iQOO 15R और iQOO Neo 10 की नई कीमतें लागू कर दी हैं.
इससे पहले OnePlus, Vivo और Oppo भी अपने स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा चुके हैं. इसकी बड़ी वजह मेमोरी और स्टोरेज कंपोनेंट्स की लगातार बढ़ती लागत है. आइए अब जरा देख लेते हैं इन फोन्स की कीमतों में कितना इजाफा हुआ है.
iQOO 15 की कीमत में हुई सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
iQOO 15 की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है. इसके 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल की कीमत अब 85,999 रुपये हो गई है. लॉन्च के समय यही फोन 72,999 रुपये में आया था. यानी कीमत में सीधे 13,000 रुपये का इजाफा हुआ है. वहीं, 16GB RAM और 512GB स्टोरेज वाले टॉप मॉडल की कीमत अब 93,999 रुपये हो गई है, जबकि इसे 79,999 रुपये में लॉन्च किया गया था.
iQOO 15R के दाम में भी बड़ा इजाफा
iQOO 15R का 8GB + 256GB मॉडल अब 53,999 रुपये में मिल रहा है. 12GB + 256GB वेरिएंट की कीमत 59,999 रुपये और 12GB + 512GB वाला टॉप मॉडल 66,999 रुपये में लिस्ट किया गया है. बता दें कि iQOO 15R को भारत में 24 फरवरी को लॉन्च किया गया था. उस समय इसके तीनों मॉडल की कीमत 44,999 रुपये, 47,999 रुपये और 52,999 रुपये थी.
iQOO Neo 10 भी हुआ महंगा
वहीं, iQOO Neo 10 की कीमत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अब फोन का 8GB + 256GB वेरिएंट ₹43,999 और 12GB + 256GB मॉडल ₹48,999 में मिल रहा है. लॉन्च के समय इसकी शुरुआती कीमत ₹31,999 थी. यह कीमत 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की थी, लेकिन अब कंपनी ने इस मॉडल को बंद कर दिया है. इसके अलावा, 8GB + 256GB मॉडल की कीमत पहले ₹33,999 और 12GB + 256GB मॉडल की कीमत ₹35,999 थी. अब इन दोनों फोन की कीमत काफी बढ़ गई है.
| फोन | लॉन्च कीमत | नई शुरुआती कीमत |
| iQOO 15 | ₹72,999 | ₹85,999 |
| iQOO 15R | ₹44,999 | ₹53,999 |
| iQOO Neo 10 | ₹33,999 | ₹43,999 |
AI की बढ़ती डिमांड से महंगी हुई मेमोरी
मेमोरी और स्टोरेज से जुड़े सामान, जैसे DRAM और NAND, की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह AI का बढ़ता यूज है. AI के लिए बनाए जा रहे डेटा सेंटर में बड़ी मात्रा में RAM और स्टोरेज की जरूरत पड़ती है. इसलिए RAM बनाने वाली कंपनियां अपनी ज्यादा सप्लाई AI कंपनियों को दे रही हैं.
इसके अलावा, कंपनियां अब नॉर्मल मेमोरी बनाने के बजाय HBM जैसी ज्यादा तेज और बेहतर मेमोरी बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. इससे बाजार में नॉर्मल मेमोरी की सप्लाई कम हो रही है. सप्लाई घटने की वजह से इन मेमोरी चिप्स की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं.
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