Bluetooth ऑन रखते ही कितनी बैटरी फुर्र हो जाती है? ईयरफोन या स्मार्टवॉच कनेक्ट करने से पहले जान लें

Bluetooth ऑन रखते ही क्या सच में फोन की बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है? या फिर ईयरफोन्स और स्मार्टवॉच कनेक्ट करने से बस हल्का-सा असर पड़ता है? अगर ये सवाल आपके दिमाग में भी घूमते रहते हैं, तो आइए जानते हैं इसका जवाब.

आजकल स्मार्टफोन इस्तेमाल में Bluetooth बिल्कुल आम बात हो गई है. वायरलेस ईयरफोन्स हों, स्मार्टवॉच हो या फिर किसी दोस्त के साथ फाइल शेयर करनी हो, हर जगह Bluetooth काम आता है. इसी वजह से कई लोग दिनभर अपने फोन में Bluetooth ऑन ही रखते हैं. लेकिन अक्सर मन में एक सवाल आता है कि क्या Bluetooth ऑन रहने से फोन की बैटरी ज्यादा खर्च होती है? और अगर होती है, तो कितनी? कुछ लोगों को लगता है कि इससे बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है, वहीं कुछ का मानना है कि इसका असर बहुत मामूली होता है. सच क्या है, यही जानने की बात है. तो फिर आइए आपको बताते हैं.

क्या Bluetooth सच में फोन की बैटरी जल्दी खत्म कर देता है?

अक्सर लोग यही सोचते हैं, लेकिन सच थोड़ा अलग है. आजकल के स्मार्टफोन्स में Bluetooth पहले जैसा नहीं रहा. अब इसमें Bluetooth Low Energy (BLE) टेक्नोलॉजी आती है, जो बहुत कम पावर इस्तेमाल करती है. अगर आपका Bluetooth ऑन है लेकिन किसी डिवाइस से कनेक्ट नहीं है, तो ये बस बैकग्राउंड में चुपचाप चलता रहता है और बैटरी पर नाममात्र का ही असर डालता है.

आमतौर पर पूरे दिन Bluetooth ऑन रखने से कुल बैटरी का सिर्फ 1 से 3 परसेंट ही खर्च होता है. यानी सिर्फ Bluetooth की वजह से आपकी बैटरी जल्दी खत्म नहीं होती. हां, अगर आपके पास कोई बहुत पुराना स्मार्टफोन है, तो उसमें पुराने हार्डवेयर की वजह से Bluetooth थोड़ा ज्यादा बैटरी खा सकता है. लेकिन नए फोन में इसे लेकर टेंशन लेने की जरूरत नहीं है.

Bluetooth चलाने से फोन की बैटरी कितनी खर्च होती है? 

जब आप Bluetooth से earbuds, smartwatch या कार सिस्टम कनेक्ट करते हैं, तो बैटरी थोड़ी-सी ज्यादा खर्च होती है. वजह ये है कि म्यूजिक सुनते समय या कॉल पर बात करते समय Bluetooth लगातार डेटा ट्रांसफर करता रहता है. ऐसे में अगर आप करीब एक घंटे तक गाने स्ट्रीम करते हैं, तो लगभग 4 से 6 परसेंट तक बैटरी कम हो सकती है.

अब ये कितना ड्रेन होगा, ये आपके फोन के मॉडल और उसमें इस्तेमाल हो रहे Bluetooth वर्जन पर भी डिपेंड करता है. फिर भी अच्छी बात ये है कि Bluetooth आमतौर पर Wi-Fi या मोबाइल डेटा के मुकाबले कम बैटरी खपत करता है.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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