अब मोबाइल जेब में, AI कान और कलाई पर: नए गैजेट्स क्या स्मार्टफोन की जरूरत बदलने वाले हैं?

AI ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और स्मार्ट ग्लासेज अब सिर्फ एक्सेसरीज नहीं रहे, बल्कि पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम करने लगे हैं. आने वाले समय में ये गैजेट्स फोन की स्क्रीन पर आसरा कम कर सकते हैं. आइए डिटेल में जानते हैं कैसे.

स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हम किसी न किसी काम के लिए फोन का यूज करते हैं. लेकिन अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में हर काम के लिए फोन की स्क्रीन देखने की जरूरत कम हो जाएगी?

Apple के हालिया लॉन्च के बाद AI ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और स्मार्ट ग्लासेज को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कंपनियां अब ऐसे गैजेट्स बनाने पर काम कर रही हैं, जो सिर्फ फोन के साथ कनेक्ट न हों, बल्कि आपके लिए पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम करें. यानी फोन जेब में रहे और जरूरी काम कान, कलाई या आंखों के सामने मौजूद गैजेट से हो जाए.

AI ईयरबड्स बन सकते हैं आपके नए पर्सनल असिस्टेंट

पहले ईयरबड्स का काम सिर्फ गाने सुनना और कॉल पर बात करना था. अब इनमें AI की एंट्री हो चुकी है. नए AI ईयरबड्स में वॉइस कमांड, लाइव ट्रांसलेशन और हैंड्स-फ्री असिस्टेंट जैसे फीचर्स मिलने लगे हैं.

मान लीजिए आप गाड़ी चला रहे हैं और किसी जरूरी मैसेज का जवाब देना है. फोन निकालने की जगह आप सिर्फ बोलकर काम कर सकते हैं. विदेश यात्रा के दौरान सामने वाला व्यक्ति दूसरी भाषा बोल रहा हो, तो लाइव ट्रांसलेशन फीचर काफी मददगार हो सकता है.

हालांकि हर AI फीचर हर यूजर के लिए जरूरी नहीं है. अगर कोई व्यक्ति सिर्फ गाने सुनने और कॉल करने के लिए ईयरबड्स खरीद रहा है, तो महंगे AI फीचर्स उसके ज्यादा काम नहीं आएंगे. इसलिए फीचर देखकर नहीं, अपनी जरूरत देखकर खरीदारी करना ज्यादा समझदारी होगी.

स्मार्टवॉच अब सिर्फ कदम गिनने वाली मशीन नहीं

कुछ साल पहले तक स्मार्टवॉच को लोग फिटनेस बैंड का थोड़ा एडवांस वर्जन मानते थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. नई स्मार्टवॉच में हेल्थ सेंसिंग, स्लीप ट्रैकिंग, रेडीनेस स्कोर, सेफ्टी अलर्ट और AI असिस्टेंट जैसे फीचर्स आने लगे हैं.

ऑफिस जाने वाले लोगों से लेकर बुजुर्गों और फिटनेस पसंद करने वाले युवाओं तक, अलग-अलग लोगों के लिए इनका यूज अलग हो सकता है. कोई अपनी नींद और एक्टिविटी ट्रैक करना चाहता है, तो किसी के लिए इमरजेंसी या सेफ्टी फीचर ज्यादा जरूरी हो सकता है.

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. स्मार्टवॉच  से मिलने वाला हेल्थ डेटा उपयोगी जानकारी दे सकता है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए.

स्मार्ट ग्लासेज बदल सकते हैं फोन देखने का तरीका

अब सबसे दिलचस्प कैटेगरी स्मार्ट ग्लासेज की है. इनमें कैमरा, वॉइस असिस्टेंट और AI जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं. भविष्य में आपको किसी जानकारी के लिए बार-बार फोन निकालने की जरूरत कम हो सकती है.

उदाहरण के लिए, रास्ता पूछना हो, किसी चीज की जानकारी चाहिए या हैंड्स-फ्री फोटो और वीडियो लेना हो, तो स्मार्ट ग्लासेज काम आ सकते हैं. हालांकि भारत में यह कैटेगरी अभी शुरुआती दौर में है और इसकी कीमत, बैटरी लाइफ और प्राइवेसी जैसी बातें बड़ी चुनौती हैं.

AI गैजेट खरीदने से पहले इन बातों को जरूर देखें

नया AI गैजेट खरीदने से पहले सिर्फ उसके बड़े-बड़े फीचर्स पर भरोसा नहीं करना चाहिए. यह जरूर जांचें कि वह आपके स्मार्टफोन और ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ठीक से काम करेगा या नहीं.

इसके अलावा बैटरी लाइफ, सॉफ्टवेयर सपोर्ट, रिपेयर की सुविधा और लोकल लैंग्वेज सपोर्ट भी महत्वपूर्ण हैं. खासकर AI गैजेट में यह जानना जरूरी है कि आपकी वॉइस रिकॉर्डिंग, हेल्थ डेटा और पर्सनल इंफॉर्मेशन का यूज कैसे किया जाएगा.

आने वाले समय में गैजेट की अगली रेस शायद बड़ी स्क्रीन देने की नहीं, बल्कि स्क्रीन से दूर रखते हुए ज्यादा काम करने की होगी. AI ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और स्मार्ट ग्लासेज उसी दिशा में पहला कदम हैं. हालांकि स्मार्टफोन जल्द खत्म होने वाला नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि भविष्य में फोन हमारी जेब में रहेगा और AI हमारी कलाई, कान और आंखों के ज्यादा करीब पहुंच जाएगा.

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लेखक के बारे में

By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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