कभी पड़ोसियों के साथ शेयर करते थे एक फोन, आज Google के CEO हैं सुंदर पिचाई, जानिए कैसे पहुंचे चेन्नई से सिलिकॉन वैली तक

चेन्नई के साधारण घर से निकले सुंदर पिचाई ने सीमित सुविधाओं के बीच पढ़ाई की. आज वह Google की कमान संभाल रहे हैं. IIT खड़गपुर और स्टैनफोर्ड के बाद 2004 में Google पहुंचे और Chrome जैसे बड़े प्रोडक्ट पर काम किया.

आज दुनिया के करोड़ों लोग Google पर कुछ न कुछ सर्च करते हैं, Chrome पर इंटरनेट चलाते हैं और Android फोन यूज करते हैं. लेकिन शायद कम ही लोग जानते हैं कि इन टेक्नोलॉजीज को लीड करने वाला शख्स एक समय ऐसा भी देख चुका है, जब उसके घर में फोन तक आसानी से उपलब्ध नहीं था. चेन्नई के एक साधारण परिवार से निकलकर सुंदर पिचाई ने IIT खड़गपुर, स्टैनफोर्ड और सिलिकॉन वैली का सफर तय किया और आखिरकार Google की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंचे. उनकी कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि सही मौके को पहचानने और मुश्किल काम से पीछे न हटने की भी है.

चेन्नई के उस घर से शुरू हुई कहानी, जहां टेक्नोलॉजी एक लग्जरी थी

सुंदर पिचाई का बचपन चेन्नई में बीता. परिवार बहुत अमीर नहीं था और उस दौर में टेक्नोलॉजी आज जैसी आसानी से उपलब्ध नहीं थी. एक इंटरव्यू में पिचाई ने बताया था कि उनके परिवार को कभी-कभी पानी की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और फोन, टीवी व फ्रिज जैसी चीजें भी उनके घर में काफी बाद में आईं.

हाल ही में Lex Fridman Podcast पर अपने बचपन को याद करते हुए पिचाई ने बताया कि उनके घर का रोटरी फोन (rotary phone) पड़ोस के लोग भी यूज करते थे. सूखे के दिनों में पानी लेने के लिए लंबी कतार में खड़े होने का एक्सपीरियंस भी उन्होंने शेयर किया. शायद यही वजह रही कि जब टेक्नोलॉजी उनके जीवन में आई, तो उन्होंने उसे सिर्फ गैजेट के तौर पर नहीं देखा, बल्कि लोगों की जिंदगी आसान बनाने वाले साधन के रूप में समझा.

IIT खड़गपुर ने बदली जिंदगी की दिशा

स्कूली पढ़ाई के बाद सुंदर पिचाई IIT खड़गपुर पहुंचे, जहां उन्होंने Metallurgical Engineering की पढ़ाई की. यहीं से टेक्नोलॉजी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हुआ. IIT में ही उनकी मुलाकात अंजलि से भी हुई, जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं.

पिचाई ने 2026 में IIT खड़गपुर को भेजे एक संदेश में अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने वहीं शुरुआती तौर पर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का एक्सपीरियंस हासिल किया था. उन्होंने अपने हॉस्टल रूम, पढ़ाई और कॉलेज की पुरानी यादों का भी जिक्र किया.

अमेरिका जाने का मौका मिला तो पिता ने खर्च कर दी एक साल की सैलरी

IIT के बाद पिचाई ने आगे की पढ़ाई के लिए स्टैनफोर्ड (Stanford) का रुख किया. यह फैसला उनके परिवार के लिए आसान नहीं था. स्टैनफोर्ड के 2026 Commencement में पिचाई ने बताया कि जब उन्हें स्टैनफोर्ड से बुलावा आया, तब उनके पिता ने उनका हवाई टिकट खरीदने के लिए लगभग एक साल की सैलरी के बराबर रकम खर्च कर दी थी. यह पिचाई की पहली हवाई यात्रा भी थी.

स्टैनफोर्ड पहुंचने के बाद उनका इरादा PhD करने और अकादमिक क्षेत्र में जाने का था. लेकिन जिंदगी ने उन्हें दूसरी दिशा में मोड़ दिया. उन्होंने PhD छोड़कर नौकरी करने का फैसला किया और आगे चलकर यही फैसला उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना.

Google में नौकरी मिली, लेकिन असली कहानी इसके बाद शुरू हुई

सुंदर पिचाई ने 2004 में Google जॉइन किया. उनके शुरुआती कामों में Google Toolbar और बाद में Chrome जैसे प्रोडक्ट्स शामिल रहे. Chrome की कहानी खास तौर पर दिलचस्प है.

पिचाई ने 2026 में स्टैनफोर्ड में बताया कि Chrome बनाने वाली शुरुआती टीम में करीब 10 लोग थे, जबकि कंपनी के भीतर यह माना जा रहा था कि एक नया ब्राउजर बनाना बेहद मुश्किल काम होगा और इसके लिए बड़ी टीम चाहिए होगी. Chrome लॉन्च हुआ तो शुरुआत में तेजी से सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद टीम ने काम जारी रखा और लगातार नए अपडेट जारी किए.

Google इंटरव्यू का एक मजेदार किस्सा

पिचाई का Google में आखिरी इंटरव्यू 2004 में 1 अप्रैल को हुआ था. उसी दिन Gmail लॉन्च हुआ था. जब इंटरव्यू के दौरान उनसे Gmail को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्हें कुछ समय के लिए लगा कि शायद यह April Fool's Day का मजाक है. उस समय 1GB फ्री स्टोरेज देना उन्हें काफी बड़ा और लगभग अविश्वसनीय विचार लगा था.

देखते ही देखते Google के सबसे बड़े फैसलों का हिस्सा बने

पिचाई ने धीरे-धीरे Google के कई बड़े और जरूरी प्रोडक्ट्स पर काम करना शुरू किया. उन्होंने Android और Chrome जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी संभाली. अपने काम और काबिलियत के दम पर वह आगे बढ़ते गए और आखिरकार Google की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच गए.

2015 में पिचाई को Google का CEO बनाया गया. इसके बाद 2019 में Larry Page और Sergey Brin ने घोषणा की कि सुंदर पिचाई Google और Alphabet दोनों के CEO होंगे.

शांत स्वभाव, लेकिन मुश्किल काम से कभी पीछे नहीं हटे

पिचाई की सफलता की एक खास बात यह भी है कि वह अक्सर बहुत शांत और कम बोलने वाले लीडर के तौर पर देखे जाते हैं. लेकिन उनके मुताबिक, मुश्किल काम चुनना उनके करियर का अहम हिस्सा रहा है.

2026 में स्टैनफोर्ड के छात्रों को उन्होंने अपनी जिंदगी के तीन सिंपल फिल्टर्स बताए:

  • ऑप्टिमिज्म चुनिए, मुश्किल हालात में भी सकारात्मक नजरिया रखिए.
  • मुश्किल काम से पीछे मत हटिए, अगर कठिन काम करने का मौका मिले तो उसे स्वीकार कीजिए.
  • जो चीज आपको एक्साइट करती है, वही कीजिए.

पिचाई की कहानी की सबसे दिलचस्प बात शायद यही है. जिस शख्स के घर में फोन और कंप्यूटर जैसी चीजें कभी आसानी से उपलब्ध नहीं थीं, उन्होंने आगे चलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिसे दुनिया के अरबों लोग यूज करते हैं. उनके लिए सिलिकॉन वैली तक पहुंचना सिर्फ एक नौकरी का सफर नहीं था, बल्कि उस टेक्नोलॉजी तक पहुंच बनाने का सफर था, जिसने कभी उनकी अपनी जिंदगी बदली थी.

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लेखक के बारे में

By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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