क्या AC की भी एक्सपायरी डेट होती है? जानिए कब होता है इसे बदलने का सही समय

AC की लाइफ सीमित होती है, भले ही उस पर एक्सपायरी डेट न लिखी हो. समय के साथ इसकी कूलिंग और परफॉरमेंस घटने लगती है. इससे बिजली खर्च बढ़ता है और खराबी की समस्या भी आती है. लगातार दिक्कतें दिखें तो समझ लें कि अब नया AC लेना बेहतर ऑप्शन है.

गर्मी बढ़ते ही AC की डिमांड भी तेजी से बढ़ जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका पुराना AC अब भी उतना ही दमदार काम कर रहा है या नहीं? समय के साथ इसकी कूलिंग, परफॉर्मेंस और एनर्जी एफिशिएंसी धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसका सीधा असर आपकी बिजली के बिल पर पड़ता है, और बार-बार खराब होने की परेशानी अलग होती है. 

ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि कब आपका AC बदलने का सही समय आ गया है. आज हम आपको कुछ ऐसे संकेत बताएंगे, जो साफ इशारा करते हैं कि अब नए AC पर पैसे खर्च करना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

क्या आपके AC की भी कोई एक्सपायरी डेट होती है?

ज्यादातर AC पर कोई एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह हमेशा चलता रहेगा. आखिरकार, AC भी एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है. जैसे-जैसे AC पुराना होता है, उसकी कूलिंग और परफॉर्मेंस दोनों पर असर पड़ता है. इतना ही नहीं, पुराने AC का इस्तेमाल करने से बिजली का बिल बढ़ सकता है, बार-बार खराबी आ सकती है. कई बार तो सेफ्टी से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं. इसलिए समय रहते यह समझना जरूरी है कि आपका AC अब अपग्रेड मांग रहा है या नहीं.

AC आमतौर पर कितने समय तक चलता है?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आमतौर पर एक AC की लाइफ 10 से 15 साल मानी जाती है. हालांकि, इसकी असली लाइफ इस बात पर डिपेंड करती है कि आप कौन-सा AC यूज कर रहे हैं, उसकी देखभाल कैसी है और उसका यूज कितना होता है.

स्प्लिट AC की बात करें, तो अगर इसकी समय-समय पर सर्विस कराई जाए और सही तरीके से मेंटेन किया जाए, तो यह आराम से 15 साल तक बेहतरीन परफॉर्मेंस दे सकता है. वहीं, विंडो AC की लाइफ थोड़ी कम होती है और ज्यादातर यूनिट्स को 8 से 10 साल के बाद बदलने की जरूरत पड़ सकती है.

दिलचस्प बात यह है कि कई कंपनियां अपने AC के कंप्रेसर पर 10 साल तक की वारंटी देती हैं. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि AC के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से को लंबे समय तक चलने के लिए ही डिजाइन किया जाता है.

AC बदलने का सही समय कब है? इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

  • बार-बार खराब होना
  • कूलिंग पहले जैसी न रहना
  • बिजली का बिल अचानक बढ़ जाना
  • अजीब आवाजें आना
  • पानी या गैस लीक होना
  • पुरानी टेक्नोलॉजी होना

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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