इंटरनेट पर हर वेबसाइट खोलते ही सामने आने वाला Accept Cookies और Reject Cookies का पॉप-अप अब सिर्फ एक औपचारिकता बनता जा रहा है. हालिया रिपोर्ट्स ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है- यूजर अगर Reject भी चुन ले, तब भी कई वेबसाइट्स उसका डेटा ट्रैक करना बंद नहीं करतीं. यानी आपकी ‘ना’ के बावजूद आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखी जा रही है, जो सीधे तौर पर प्राइवेसी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है.
कुकीज क्या हैं और क्यों होती हैं इस्तेमाल?
जब भी आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं, तो वह एक छोटी टेक्स्ट फाइल आपके ब्राउजर में सेव करती है, जिसे कुकीज कहा जाता है. इनका मकसद आपके लॉगिन, पसंद और ब्राउजिंग पैटर्न को याद रखना होता है ताकि अगली बार अनुभव बेहतर बनाया जा सके. लेकिन यही सिस्टम अब यूजर ट्रैकिंग का बड़ा जरिया बन चुका है.
Reject के बाद भी ट्रैकिंग? रिपोर्ट ने खोली पोल
नई स्टडी के मुताबिक, बड़ी संख्या में वेबसाइट्स यूजर के Reject Cookies ऑप्शन चुनने के बाद भी ट्रैकिंग जारी रखती हैं. अनुमान है कि करीब 78% साइट्स इस नियम का सही पालन नहीं कर रहीं. यानी यूजर की अनुमति के बिना डेटा कलेक्शन हो रहा है, जो प्राइवेसी नियमों का उल्लंघन माना जाता है.
बड़ी टेक कंपनियों पर भी सवाल
इस पूरे मामले में Google और Meta जैसी बड़ी कंपनियों के नाम भी चर्चा में आये हैं. रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि इन प्लैटफॉर्म्स के जरिये भी यूजर डेटा ट्रैकिंग जारी रहती है, भले ही यूजर ने साफ मना कर दिया हो. हालांकि कंपनियां इन दावों को पूरी तरह खारिज करती हैं और कहती हैं कि उनका सिस्टम नियमों के अनुसार काम करता है.
कानून और फाइन: क्यों नहीं रुक रहा खेल?
कई देशों में डेटा प्राइवेसी को लेकर सख्त नियम बने हुए हैं, लेकिन इनका पालन हर जगह समान रूप से नहीं हो रहा. कंपनियों पर भारी जुर्माना भी लगाया जाता है, फिर भी यह समस्या खत्म नहीं हो रही. वजह साफ है- डेटा से होने वाली कमाई इतनी ज्यादा है कि जुर्माना उनके लिए एक कॉस्ट ऑफ बिजनेस जैसा बन गया है.
यूजर्स के लिए क्या है खतरा?
अगर वेबसाइट्स आपकी अनुमति के बिना डेटा ट्रैक कर रही हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी ऑनलाइन आदतें, लोकेशन, सर्च हिस्ट्री और पसंद-नापसंद लगातार रिकॉर्ड हो रही हैं. इसका इस्तेमाल टार्गेटेड विज्ञापन से लेकर प्रोफाइलिंग तक में किया जा सकता है. ऐसे में यूजर की डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों खतरे में आ सकती हैं.
सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव
डिजिटल दुनिया में पूरी तरह सुरक्षित रहना आसान नहीं है, लेकिन जागरूकता जरूरी है. सिर्फ Reject पर क्लिक करना काफी नहीं, बल्कि ब्राउजर सेटिंग्स, प्राइवेसी टूल्स और ट्रैकिंग ब्लॉकर्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी हो गया है. आने वाले समय में डेटा सुरक्षा को लेकर और सख्त नियम बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल यूजर को खुद ही सतर्क रहना होगा.
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