iPhone का ट्रैकिंग फीचर ने दिया धोखा तो यूजर पहुंचा कोर्ट; Apple को देना होगा अब मुआवजा

iPhone का भरोसेमंद माना जाने वाला ट्रैकिंग फीचर एक यूजर के लिए काम नहीं आया, और मामला सीधे कोर्ट तक पहुंच गया. आयोग ने Apple को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

iPhone में एक शानदार फीचर होता है, जिससे फोन स्विच ऑफ होने के बाद भी उसे ट्रैक किया जा सकता है. लेकिन सोचिए, अगर यही फीचर फेल हो जाए तो क्या होगा? एक ऐसे ही मामले में चोरी हुए iPhone को ट्रैक नहीं किया जा सका, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया. आखिरकार कंज्यूमर कोर्ट ने Apple पर 1 लाख रुपये का मुआवजा लगाने का आदेश दे दिया. आइए आपको इस पूरे मामले के बारे में डिटेल में बताते हैं.

क्या है पूरा मामला?

Apple के डिवाइस में Find My नाम का एक खास फीचर होता है, जिससे iPhone, iPad या AirPods को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. iOS 15 के बाद इसे और एडवांस बना दिया गया. अब फोन बंद हो या बैटरी खत्म हो, फिर भी Bluetooth सिग्नल के जरिए उसकी लोकेशन पता चल सकती है.

लेकिन शान मोहम्मद के मामले में यही सिस्टम फेल हो गया. शान मोहम्मद दिल्ली के रहने वाले हैं. ये Weather Cool Services के मालिक हैं और 2015 से iPhone यूजर रहे हैं. उन्हें iPhone के खास फीचर्स (Find My) पर पूरा भरोसा था. इसी भरोसे के चलते उन्होंने 10 फरवरी 2022 को ₹70,500 खर्च करके iPhone 13 खरीदा, जो iOS 15 के साथ आता है.

मोहम्मद ने डिवाइस ढूंढने के लिए हर संभव कोशिश की. चाहे वो Apple की वेबसाइट हो, iCloud, कस्टमर केयर या फिर सर्विस सेंटर. लेकिन अफसोस, हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी. उनकी तमाम कोशिशें बेकार साबित हुईं और डिवाइस का कोई सुराग नहीं मिल पाया. इसके बाद उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट का सहारा लिया.

Apple को देना पड़ेगा मुआवजा 

साउथ दिल्ली के जिला उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में Apple को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है. आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की बेंच ने माना कि कंपनी ने अपने ट्रैकिंग फीचर से जुड़ी जरूरी जानकारी साफ तौर पर यूजर्स तक नहीं पहुंचाई.

दरअसल, iPhone के स्विच ऑफ होने पर जो ट्रैकिंग से जुड़ा मैसेज दिखाई देता है, वो सिर्फ यह बताता है कि इस डिवाइस में ऐसा फीचर मौजूद है. लेकिन इसे सही तरह से इस्तेमाल करने के लिए फोन में ‘Find My Device’ पहले से ऑन होना जरूरी है. आयोग का कहना है कि Apple ने इस जरूरी कंडीशन को कहीं भी स्पष्ट नहीं किया है. इसी लापरवाही को देखते हुए कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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