Budget 2026: क्या और महंगा हो जाएगा 5G स्मार्टफोन? टैक्स और GST पर बड़े ऐलान की उम्मीद

केंद्रीय Budget 2026 से पहले स्मार्टफोन यूजर्स की नजरें सरकार के फैसलों पर टिकी हैं. बढ़ती चिपसेट कीमतें, AI की मांग और सप्लाई चेन दबाव के चलते फोन महंगे हो सकते हैं. इंडस्ट्री GST में कटौती और घरेलू कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की उम्मीद कर रही है, जिससे कीमतों को काबू में रखा जा सके.

आज संसद में पेश होने वाले केंद्रीय Budget 2026 पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. बजट में टैक्स और छूट को लेकर ऐलान होंगे. कई सामान सस्ते और महंगे किए जाते हैं. ऐसे में खासकर स्मार्टफोन यूजर्स और गैजेट्स के शौकीन यह जानना चाहते हैं, कि बजट के बाद नया फोन खरीदना सस्ता होगा या फिर जेब पर ज्यादा भार पड़ेगा. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट है और आज स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. ऐसे में कीमतों में बदलाव का असर सीधे करोड़ों लोगों पर पड़ता है.

वहीं टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्मार्टफोन की कीमतें इस समय कई ग्लोबल और लोकल वजहों के कारण दबाव में हैं. ऐसे में बजट 2026-27 से इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें हैं कि सरकार कुछ राहत दे सकती है.

इस साल कीमतों पर असर क्यों पड़ सकता है?

पिछले 2-3 सालों में कई भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां मार्केट में आई हैं. इससे चीनी कंपनियों को अपनी कीमतें कुछ हद तक कम करनी पड़ीं. लेकिन इस साल हालात अलग हो सकते हैं. AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग के कारण चिपसेट महंगे हो रहे हैं. इसके अलावा ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतें और अलग-अलग देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ भी कीमतें बढ़ाने की वजह बन सकते हैं.

इंडस्ट्री जानकारों का कहना है कि दुनियाभर में AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग का असर स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर भी पड़ा है. AI डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई है, जिस वजह से इनकी कीमतें करीब 160% तक बढ़ चुकी हैं. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, इंपोर्टेड कंपोनेंट्स पर निर्भरता ने मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को और बढ़ा दिया है.

बजट में सरकार को किस पर फोकस करना चाहिए?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अब भारत को सिर्फ स्मार्टफोन असेंबल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, PCB (सर्किट बोर्ड) और अन्य जरूरी कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग देश में होनी चाहिए. इससे भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनेगा और लागत भी कम हो सकती है. साथ ही रिसर्च, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर इनोवेशन पर भी जोर जरूरी है.

GST और टैक्स में राहत की उम्मीद

स्मार्टफोन इंडस्ट्री सरकार से GST कम करने की मांग कर रही है. खासकर 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन्स पर GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग है. साथ ही 20,000 रुपये से कम कीमत वाले 5G स्मार्टफोन्स पर टैक्स में राहत देने की मांग है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग 5G टेक्नोलॉजी अपना सकें. इससे कंपनियों को बढ़ती लागत का कुछ बोझ खुद उठाने में मदद मिलेगी और ग्राहकों पर पूरा असर नहीं पड़ेगा.

अगर राहत नहीं मिली तो क्या होगा?

इंडस्ट्री का मानना है कि अगर टैक्स में कोई कटौती नहीं हुई और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा नहीं मिला, तो कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं. ऐसे में फरवरी के बाद स्मार्टफोन की कीमतों में 5% से 10% तक बढ़ोतरी हो सकती है.

लंबी अवधि में क्या होगा फायदा?

फिलहाल बड़े स्तर पर कीमतों में कटौती मुश्किल है. लेकिन अगर बजट में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, कस्टम ड्यूटी में राहत और PLI स्कीम को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले समय में स्मार्टफोन की कीमतें स्टेबल रह सकती हैं. इससे खासकर एंट्री और मिड-रेंज यूजर्स को 5G स्मार्टफोन अपनाने में मदद मिलेगी. ऐसे में अब सबकी निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट ऐलान पर टिकी हैं. अगर सरकार ने टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग पर राहत दी, तो स्मार्टफोन की कीमतें कम हो सकती हैं. वरना नया फोन खरीदना आने वाले दिनों में थोड़ा महंगा सौदा साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By Shivani Shah

डिजिटल पत्रकारिता में 3 सालों का अनुभव है. प्रभात खबर में जूनियर टेक कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं. टेक्नोलॉजी कैटेगरी में ये स्मार्टफोन से लेकर टेक-टिप्स, गैजेट्स, एआई, सॉफ्टवेयर और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च-बेस्ड, इन-डेप्थ और यूजर-फोकस्ड कंटेंट लिखती हैं. इसके अलावा ये ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें भी लिखती हैं.

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