WiFi स्लो है? हो सकता है आपने राउटर गलत जगह रखा हो, जानिए घर में रखने की सही लोकेशन

घर में इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के लिए सिर्फ महंगा प्लान लेना ही काफी नहीं होता है. कई बार राउटर को सही जगह पर रखने से ही सिग्नल काफी बेहतर हो जाता है और इंटरनेट ज्यादा स्मूद चलने लगता है. ऐसे में अगर आपका WiFi बार-बार स्लो हो जाता है, तो हो सकता है वजह राउटर की लोकेशन हो.

जरा सोचिए, आप दोस्तों के साथ मूवी देखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, बगल में स्नैक्स रखा है, लेकिन तभी WiFi बार-बार अटकने लगता है और इंटरनेट स्लो हो जाता है. अब भला ऐसी हालत में गुस्सा न आए तो फिर क्या आए. बहुत से लोगों के लिए स्लो इंटरनेट अब रोज की झुंझलाहट बन चुका है. अब इसका दोष अक्सर हम सर्विस प्रोवाइडर या पुराने प्लान पर डाल तो देते हैं, लेकिन असली वजह शायद कुछ और ही है.

क्यों स्लो हो जाता WiFi स्पीड?

हो सकता है आपके घर में रखा राउटर ही स्लो स्पीड की असली वजह हो. अक्सर लोग इसे किसी कोने में रख देते हैं, फर्नीचर के पीछे छिपा देते हैं या बहुत नीचे रख देते हैं, जिससे सिग्नल ठीक से फैल ही नहीं पाता. ऐसे में चाहे राउटर कितना भी अच्छा हो या आपने कितना ही महंगा प्लान ले रखा हो, सही रिजल्ट नहीं मिलता. बीच में दीवारें, ज्यादा दूरी और दूसरी डिवाइस से होने वाला इंटरफेरेंस स्पीड कम कर देता है, और आप जिस स्पीड के पैसे दे रहे हैं, उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता.

लेकिन अच्छी बात ये है कि कुछ बदलाव करके आप तुरंत फर्क देख सकते हैं. जैसे राउटर को थोड़ी ऊंचाई पर रखना और उसे दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से दूर रखना. ऐसा करने से कवरेज बेहतर होती है और इंटरनेट कनेक्शन ज्यादा स्टेबल हो जाता है. साथ ही, घर में मौजूद दूसरे 2.4 GHz और 5 GHz वाले डिवाइस पर भी ध्यान रखें, क्योंकि ये भी सिग्नल में रुकावट डाल सकते हैं.

WiFi राउटर को कहां रखना चाहिए?

अपने राउटर को ऐसे समझिए जैसे वो चुपचाप हर दिशा में सिग्नल भेजने वाला एक ब्रॉडकास्टर हो. ठीक से काम करने के लिए उसे थोड़ी खुली जगह चाहिए. अगर आप राउटर को लिविंग रूम में या घर की किसी ओपन जगह पर, थोड़ा ऊंचाई पर रखते हैं, तो सिग्नल आसानी से पूरे घर में फैल पाता है. कोशिश करें कि राउटर घर के बीचों-बीच रखा हो, इससे कवरेज बेहतर मिलती है.

अगर आप उसे खिड़की के पास या घर के किसी कोने वाले कमरे में रख देते हैं, तो सिग्नल का बड़ा हिस्सा बाहर ही चला जाता है. एडजस्ट होने वाली एंटीना सिग्नल को अंदर की तरफ मोड़ने में मदद कर सकती हैं, लेकिन सबसे मजबूत इंटरनेट तभी मिलता है जब राउटर उन डिवाइसेज के पास हो, जिन्हें आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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