टेक दिग्गज Apple को अपने ही वादों पर सवालों का सामना करना पड़ा है. कंपनी ने उन आरोपों को लेकर समझौता कर लिया है, जिनमें कहा गया था कि उसने अपने Apple Intelligence फीचर्स को लेकर यूजर्स को गुमराह किया. इस मामले में Apple करीब 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2000 करोड़ रुपये) तक का भुगतान करने को तैयार हो गया है. यह रकम खास तौर पर iPhone 15 और iPhone 16 खरीदने वाले यूजर्स को दी जाएगी.
मामला क्या है और क्यों हुआ विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब Apple ने अपने AI फीचर्स, खासकर नए Siri अपडेट को लेकर बड़े दावे किए थे.
आरोप है कि कंपनी ने ऐसे फीचर्स का प्रचार किया जो उस समय मौजूद ही नहीं थे, और बाद में भी उन्हें समय पर लॉन्च नहीं किया गया.
यूजर्स का कहना था कि इन वादों के चलते उन्होंने नए iPhones खरीदे, लेकिन उन्हें वह एक्सपीरियंस नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी.
यूजर्स को कितना मिलेगा मुआवजा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में iPhone 15 और iPhone 16 खरीदने वाले यूजर्स को 25 से 95 डॉलर तक का मुआवजा मिल सकता है.
हालांकि, यह समझौता अभी कोर्ट की मंजूरी के अधीन है. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह टेक इंडस्ट्री के बड़े सेटलमेंट्स में से एक बन सकता है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि Apple ने इस मामले में किसी भी तरह की गलती स्वीकार नहीं की है.
Siri अपडेट क्यों बन गया बड़ा मुद्दा?
Apple का नया Siri अपडेट पिछले कुछ सालों से चर्चा में है, लेकिन अब तक इसे पूरी तरह लॉन्च नहीं किया जा सका है.
कंपनी ने इसे iOS 18 के साथ पेश करने की योजना बनाई थी, लेकिन लगातार देरी होती रही.
बताया जा रहा है कि Apple ने इस बीच Google के Gemini AI के साथ साझेदारी भी की, ताकि Siri को ज्यादा स्मार्ट बनाया जा सके.
इसके बावजूद, यूजर्स को अब तक वह अपडेट नहीं मिला, जिससे विवाद और बढ़ गया.
आगे क्या है Apple का प्लान?
अब खबर है कि Apple Siri को एक नए रूप में पेश करने की तैयारी कर रहा है.
कंपनी इसे एक चैटबॉट की तरह विकसित कर सकती है, जो टेक्स्ट, इमेज और डॉक्यूमेंट जैसे मल्टी-मोडल इनपुट समझ सके.
संभावना है कि इस नए Siri की झलक कंपनी अपने वार्षिक डेवलपर इवेंट में दिखा सकती है और इसे आने वाले iPhone लॉन्च के साथ पेश किया जा सकता है.
यूजर्स के लिए क्या मतलब?
यह मामला साफ करता है कि अब यूजर्स टेक कंपनियों के दावों पर ज्यादा सवाल उठा रहे हैं.
AI फीचर्स को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा में कंपनियों को अब ज्यादा पारदर्शिता दिखानी होगी.
Apple के लिए यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि भरोसे को फिर से मजबूत करने की चुनौती भी है.
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