Lok Sabha Polls 2019 : WhatsApp के 87000 से ज्यादा ग्रुप्स के सहारे वोटर्स को साधेगी राजनीति

By Prabhat Khabar Digital Desk
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Lok Sabha Elections 2019 : लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है और इस बार के आम चुनाव (general elections) में सोशल मीडिया (social media) का खास बोलबाला रहनेवाला है. यहां तक कि विशेषज्ञ भी यही मानकर चल रहे हैं कि आम चुनावों में बढ़त उसी पार्टी को मिलेगी, जो सोशल मीडिया के मैदान में बढ़-चढ़कर बैटिंग करेगी.

यही वजह है कि सोशल मीडिया के सबसे बड़े प्लैटफॉर्म्स में से एक व्हाट्सऐप (whatsapp), राजनीतिक संदेशों के साथ लाखों लोगों को साधने के लिए से 87 हजार से ज्यादा ग्रुप्स (whatsapp groups) के साथ सबसे बड़े सोशल मीडिया मंच (social media platform) में बदल गया है. जानकारों के मुताबिक, भारत में लगभग 30-40 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर WhatsApp का इस्तेमाल कर रहे हैं.

हॉन्ग कॉन्ग की काउंटर प्वाइंट रिसर्च कीमानें, तो भारत में वर्तमान में लगभग 45 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं. अौर लगभग हर घर में किशोर से लेकर दादाजी के पास आज के समय में स्मार्टफोन है और अमूमन हर स्मार्टफोन यूजर व्हाट्सऐप पर है. इन लोगों तक पहुंच बनाने के लिए दिन-रात काम करनेवाले समूहों के लिए व्हाट्सऐप एक संभावित लक्ष्य है.

विशेषज्ञों की मानें, तो हर उम्र के लोग व्हाट्सऐप का प्रयोग कर रहे हैं. इसलिए यह कहना सही होगा कि फेसबुक के स्वामित्व वाले मंच की 30 करोड़ से ज्यादा भारतीयों तक पहुंच है, जो कि देश में फेसबुक यूजर के आकार के लगभग बराबर है या उससे बड़ा है.

सोशल मीडिया के जानकार बताते हैं कि मतदाताओं को प्रभावित करने के मकसद से 87 हजार से ज्यादा समूह फिलहाल व्हाट्सऐप पर सक्रिय हैं. इस चुनावी मौसम में विभिन्न सरकारी नीतियों से संबंधित नकली आंकड़ों से लेकर क्षेत्रीय हिंसा को बढ़ावा देनेवाली खबरों, राजनीतिक खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, सरकारी घोटाले, ऐतिहासिक मिथक, देशभक्ति और हिंदू राष्ट्रवाद का प्रचार व्हाट्सएेप पर नजर आनेवाला है.

चूंकि हम सभी जानते हैंकि एक व्हाट्स ग्रुप पर अधिकतम 256 यूजर हो सकते हैं, ऐसे में इन 87 हजार समूहों की 2.22 करोड़ लोगों तक सीधी पहुंच हो सकती है.

मालूमहो कि झूठी खबरों पर अंकुश लगाने की जरूरत महसूस करते हुए व्हाट्सऐप ने टीवी, रेडियो और डिजिटल मंच पर झूठी खबरों के खतरे के बारे में जागरूकता कार्यक्रमों से लेकर कई पहल शुरू की है.

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