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आज ही के दिन हुआ था दुनिया का सबसे खतरनाक Virus Attack, करीब 100 देश आए थे इसकी चपेट में

By SumitKumar Verma
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wannacry ransomware Cyber Virus attack
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Prabhat Khabar Graphics

दुनियाभर में लॉकडाउन और कोरोना वायरस के वजह से कई व्यापार ठप पड़े है. लगातार बढ़ रहे इसके प्रसार के कारण लोग कैश लेन-देन की जगह पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की ओर अग्रसर हो रहे हैं. हालांकि, इस तरह के लेन-देन से साइबर क्राइम का भी खतरा बढ़ गया है. इसी तरह वर्ष 2017 में एक खतरा उभर कर सामने आया था. दरअसल, मई महीने के 12-15 तारीख के बीच कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें लोगों ने कहा कि उनका कंप्यूटर काम करना बंद कर दिया है. 13 मई को इस मामले में खुलासा होना शुरू हो गया था.

आपको बता दें कि यह सबसे बड़ा मैलवेयर अटैक था जिसका नाम था वॉनाक्राय रैनसमवेयर (WannaCry). जिससे करीब 100 देश प्रभावित हुए थे.

आज ही के दिन से मामलों की जानकारी मिलने लगी थी. इस वायरस से कुल 2 लाख 30 हजार कंप्यूटर प्रभावित हुए थे. इस वैश्विक हमले को रैनसमवेयर टूल के जरिये किया गया था.

क्या है वॉनाक्राय रैनसमवेयर

वॉनाक्राय रैनसमवेयर को अंग्रेज़ी में WannaCry या WanaCrypt0r 2.0 कहा जाता है. वहीं, रैनसम अंग्रेजी शब्द है जिसका अर्थ है- फिरौती. यह एक रैनसमवेयर मैलवेयर टूल है जिसका प्रयोग करते हुए साइबर हमला किया गया था. इस साइबर अटैक के जरिये संस्थानों के कंप्यूटर लॉक पर अटैक किया गया था. जिससे डाटा चोरी होने की संभावना भी बढ़ गयी थी. हालांकि, हैकरों की मंशा कुछ और थी. कंप्यूटर को वापस खोलने पर फिरौती की मांग की जा रही थी. ऐसे कई मामले सामने आए थे जिसमें बिटकॉइन के रूप में 300-600 डॉलर तक की फिरौती मांगी गई थी.

एकाएक अटैक होने के बाद प्रभावित संगठन बेचैन हो गए और अपने टेक्निकल टीम को स्क्रीनशॉट्स साझा करने लगे, जिसका हल वे भी नहीं निकाल पा रहे थे. ओपेन करते समय उन्हें अंदाजा हुआ कि यह करतूत हैकर्स की है.

आपको बता दें कि इससे ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, रूस, स्पेन, इटली, वियतनाम समेत कई अन्य बड़े देश भी इससे प्रभावित हुए थे. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस भी इस हमले से प्रभावित हुई थी. साइबर सुरक्षा शोधकर्ता के मुताबिक़ बिटकॉइन मांगने के 36 हज़ार मामलों का पता चला था.

हैकर्स ने अमेरिका की नैशनल सिक्यॉरिटी ऐजेंसी जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर इतने बड़े पैमाने पर साइबर अटैक किया था. साइबर मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका की नैशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी जिस तकनीक का इस्तेमाल करती थी वह इंटरनेट पर लीक हो गई थी. जिसका फायदा उठाते हुए हैकर्स ने इतना बड़ा हमला कर दिया था.

इस हमले के बाद साइबर अलर्ट घोषित कर दिया गया था. ब्रिटेन के सुरक्षा शोध से जुड़ी एक संस्था ने 13 मई को चेतावनी देते हुए कहा था कि दूसरा बड़ा साइबर हमला 15 मई 2017 को हो सकता है. हालांकि, इसके बाद यह हमला दोबारा नहीं हुआ.

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