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IIT खड़गपुर की डिवाइस सिर्फ 45 मिनट में लगा लेगी कोरोना का पता, कोई भी कर सकेगा जांच

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
IIT Kharagpur's low cost coronavirus testing method COVIRAP
IIT Kharagpur's low cost coronavirus testing method COVIRAP
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देशभर में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है और हर दिन इस जानलेवा संक्रमण के 2 लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे समय में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर से एक अच्छी खबर आयी है. यहां एक ऐसी किट विकसित की गई है, जिसके जरिये कोई भी व्यक्ति सिर्फ 45 मिनट में कोविड-19 की जांच कर सकता है. इस प्रोडक्ट का नाम कोविरैप (COVIRAP) है, जो कोविड के अलावा ट्यूबरक्यूलोसिस सहित कई और तरह के इंफेक्शन की जांच कर सकता है.

कई संक्रामक बीमारियों के खिलाफ कारगर

आईआईटी खड़गपुर ने सफलतापूर्वक अपने स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद कोविरैप को व्यावसायिक आधार पर लॉन्च कर दिया है. संस्थान का दावा है कि यह जांच प्रौद्योगिकी कोविड-19 सहित कई संक्रामक बीमारियों के खिलाफ कारगर है. इस उत्पाद को अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती, डॉ अरिंदम मंडल और उनके अनुंसधान समूह ने विकसित किया है और इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए रैपिड डायग्नॉस्टिक ग्रुप ऑफ कंपनीज, भारत और ब्रामेरटन होल्डिंग एलएलसी, अमेरिका को लाइसेंस दिया गया है. इस प्रौद्योगिकी को मेक इन इंडिया पहल के तहत बनाया गया है.

आईआईटी खड़गपुर के नाम पेटेंट का आवेदन

आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वीके तिवारी ने कहा, यह कदम ऐसे कठिन समय उठाया जा रहा है जब कोविड-19 का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिसे आम भाषा में संक्रमण की दूसरी लहर कहा जा रहा है, पहले से अधिक तेजी से इसके फैलने का खतरा बना हुआ है. तिवारी ने कहा, इससे भी अधिक कोविरैप के व्यावसायीकरण से भारत में स्वदेशीकरण की शुरुआत होगी और भारतीय बाजार में सस्ते स्वास्थ्य उत्पाद उपलब्ध होंगे. साथ ही, वैश्विक बाजार में जो खाई है उसे भरने के लिए इस तरह की तकनीक की जरूरत है. आईआईटी खड़गपुर के नाम पेटेंट करने के लिए अमेरिका और भारत सहित विभिन्न देशों में आवेदन किया गया है.

नमूना लेने के 45 मिनट में आ जाएंगे नतीजे

अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने बताया कि अनुसंधान टीम ने आइसोथर्मल न्यूक्लिक एसिड जांच प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर कोविरैप का अद्यतन संस्करण तैयार किया, जिससे सार्स-कोव-2 (सामान्य भाषा में कोरोना वायरस) सहित विषाणुओं के संक्रमण का पता लगाया जा सकता है. इसके जरिये कोविड-19 की जांच सीधे व्यक्ति की लार के नमूने और टीम द्वारा तैयार पोर्टेबल उपकरण से की जा सकती है, इसमें अलग से आरएनए (विषाणु की आनुवांशिकी पदार्थ) निकालने की सुविधा की जरूरत नहीं होती. उन्होंने बताया कि मरीज का नमूना लेने के महज 45 मिनट में नतीजे आ जाते हैं. त्वरित नतीजे के लिए इस किट के साथ मुफ्त मोबाइल ऐप को भी पूरक के तौर तैयार किया गया है.

कोई भी, कहीं भी कर सकता है जांच

प्रोफसेर चक्रवर्ती बताते हैं कि जांच के दौरान नाक और मुंह से नमूने लिये जाते हैं और उसे घोल में डालकर पतला किया जाता है और इसके बाद प्रतिक्रियाशील द्रव्य (जिसकी आपूर्ति पहले ही तैयार स्वरूप में होती है) डालकर पोर्टेबल उपकरण में जांच की जाती है और बिना व्यक्तिगत हस्तक्षेप स्वत: ही नतीजे आ जाते हैं. उन्होंने कहा, हमने क्षेत्र में इसका प्रशिक्षण अकुशल कर्मियों की मदद से गुणवत्ता से समझौता किये बिना किया. सभी नमूनों के एकत्र करने और उनकी जांच करने की प्रक्रिया पोर्टेबल उपकरण से कहीं भी जा सकती है और इसके लिए अधिक प्रशिक्षण देने की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह प्रौद्योगिकी समुदाय स्तर पर जांच के लिए कारगर है ताकि समय रहते महामारी का पता लगाया जा सके.

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