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    अगले

    अगले आम चुनाव के लिए राजग में शामिल नहीं होगी तेदेपा : चंद्रबाबू नायडू

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को कहा कि भाजपा अगर 2019 के आम चुनाव के लिए संपर्क करे तब भी उनकी पार्टी राजग में शामिल नहीं होगी. उन्होंने साथ ही कहा कि राजग सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ‘नैतिकता बनाम बहुमत'' की लड़ाई थी. नायडू ने कहा कि तेदेपा राज्य के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर 2014 में राजग में शामिल हुई थी और ‘हम सत्ता के भूखे नहीं हैं. हमें कभी भी कैबिनेट सीटों की आकांक्षा नहीं रही.''

    अक्षय

    अक्षय कुमार, नाना पाटेकर व अनुपम खेर को चुनाव लड़ाने की तैयारी में है भाजपा?

    नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में विभिन्न क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों को मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है. हर राज्य में में कम से दो से तीन ऐसी हस्तियों को पार्टी टिकट दे सकती है. इससे पार्टी की छवि जहां जनता में निखरेगी, वहीं वह मीडिया में भी चर्चा में रहेगी. इसी कड़ी में वह फिल्म उद्योग के कुछ प्रमुख लोगों को भी मैदान में उतार सकती है. संभावना है कि फिल्म स्टार अक्षय कुमार को पार्टी पंजाब की गुरुदासपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारे. इस सीट से पहले पार्टी के दिवंगत नेता व स्टार विनोद खन्ना विजयी होते रहे, लेकिन पिछले साल उनके निधन के बाद उपचुनाव में पार्टी को यह सीट गंवानी पड़ी.

    अविश्वास

    अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में भाषण : राहुल गांधी 2019 के लिए कितने तैयार हैं?

    नयी दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में कल लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर 45 मिनट से अधिक लंबा भाषण दिया. उन्होंने अपने भाषण में मोदी सरकार को घेरने की हर संभव कोशिश की. राहुल गांधी ने भाजपा व मोदी सरकार पर तिलमिलाने वाले आरोप लगाये और नरेंद्र मोदी को प्यार भरी झप्पी भी दी. जिसकी चर्चा मीडिया में कल से ही हो रही है. राहुल गांधी यह बार-बार कहते रहे हैं कि उनके मन में नरेंद्र मोदी व भाजपा-आरएसएस वालों के लिए थोड़ा भी गुस्सा नहीं है, भले ही उनके मन में मेरे लिए कितनी भी नफरत क्यों नहीं हो. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने भाषण में कुछ नए मुहावरे गढ़े. जैसे उन्होंने मोदी को चौकीदार नहीं भागीदार कहा. राहुल का संकेत कथित भ्रष्टाचार की ओर था. इसका मोदी ने अपने अंदाज में जवाब दिया अौर कहा कि वे गरीबों के सुख-दुख के, युवाओं की आकांक्षाओं के भागीदार हैं. मोदी ने खुद को देश का और देश के खजाने का चौकीदार बताया था.

    #NoConfidenceMotion

    #NoConfidenceMotion अविश्वास प्रस्ताव गिरने का 2019 के लिए क्या हैं चुनावी मायने?

    नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी नौ महीने में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया. जिन 451 लोकसभा सांसदों ने वोटिंग में भाग लिया, उनमें मोदी सरकार के पक्ष में 325 व सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले यूपीए के पक्ष में 126 वोट पड़े. भारतीय जनता पार्टी पहले से विपक्ष के द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को शक्ति प्रदर्शन के लिए एक सुनहरे मौके के रूप में ले रही थी और वह इसमें सफल हुई. उधर, विपक्ष पहले से संकेतों में यह कह रहा था कि हां, हमारे पास संख्या बल नहीं है, लेकिन हम सरकार को विभिन्न मुद्दों पर एक्सपोज करना चाहते हैं. इसमें सोनिया गांधी का वह बयान अपवाद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसने कहा कि हमारे पास संख्या बल नहीं है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को भले उसके सबसे पुराने साथी शिवसेना का साथ नहीं मिला, लेकिन दिवंगत जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक उसके साथ आ खड़ी हुई. वहीं, बीजू जनता दल ने सदन से बर्हिगमन कर एक तरह से उसकी राह ही आसान कर दी. उसी तरह के चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने वोटिंग से अनुपस्थित रह कर एक तरह से सरकार का अप्रत्यक्ष सहयोग किया. भाजपा के दूसरे सबसे पुराने सहयोगी नीतीश कुमार के जदयू ने सरकार के समर्थन में अपना मजबूत समर्थन जताया, भले ही उनके पास अभी संख्या बल कम हो.

    मायावती

    मायावती की बसपा ने शुरू की चुनाव की तैयारी, बागी नेताओं की होगी घर वापसी

    लखनऊ : अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. बसपा ने अपने पुराने और बागी नेताओं से संपर्क करना शुरू दिया है, ताकि उनके अनुभवों का इस्तेमाल चुनाव में किया जा सके. वहीं, बसपा ने अपने संगठन में निष्क्रिय नेताओं को किनारे करने और बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए रणनीति तैयार की है. राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता को देखते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने पहले यह बयान देकर सबको चौंका दिया था कि इस साल दिसंबर में लोकसभा चुनाव हो सकते हैं. लिहाजा अब बसपा कैडर अपने सुप्रीमो के आदेश के बाद अभी से चुनाव की तैयारी में जुट गया है. इसके लिए मायावती ने राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन में बदलाव करने के बाद मंडलीय सम्मेलनों की शुरुआत कर दी है. जल्द बूथ स्तर तक टीमें उतारने के निर्देश हैं. पार्टी बूथ स्तर पर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को तवज्जो देकर उन्हें सक्रिय करने में जुटी है. पहली बार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए बसपा ने पुराने और बागी नेताओं के लिए फिर से पार्टी के दरवाजे खोलने की पहल की है.

    लोकसभा

    लोकसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस, संगठन में होंगे बड़े बदलाव

    लखनऊ : राज्य में अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही कांग्रेस पार्टी बहुत जल्द ही अपने जिला स्तरीय संगठन को मजबूती देने के लिए फेरबदल करने जा रही है. इस फेरबदल से ज्यादातर जिलों के अध्यक्ष बदल जाएंगे. इसके साथ ही अधिकतर शहर अध्यक्षों में भी फेरबदल संभव है. बहरहाल पार्टी जिलों की कमान ऐसे सक्रिय सदस्यों को देने का मन बना रही है जो पार्टी के लिए मजबूती से काम कर सकें और मजबूत साथियों के साथ अपनी टीम खड़ी कर सकें.

    मिशन

    मिशन 2019 : फरवरी तक 50 रैलियां करेंगे मोदी, शाह-राजनाथ-गडकरी का भी कार्यक्रम तय

    नयी दिल्ली : अगले साल होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 के फरवरी तक देश के अलग - अलग हिस्सों मे 50 रैलियों को संबोधित करेंगे. इसके जरिये वह 100 से अधिक लोकसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे. सूत्रों ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राजनाथ सिंह एवं नितिन गडकरी जैसे वरिष्‍ठ नेता भी 50-50 रैलियों को संबोधित करेंगे.

    नाश्ते

    नाश्ते पर एक घंटे चली अमित शाह की नीतीश कुमार से मुलाकात, फिर रात में होगी बात

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 24 घंटे के बिहार दौरे पर रांची से पटना पहुंचे और पहुंचे. वे सुबह नाश्ते पर जदयू अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिले. दोनों नेता एक घंटे तक एक साथ रहे. अमित शाह एयरपोर्ट से सीधे राजकीय अतिथिशाला पहुंचे, जहां दोनों नेताओं की मुलाकात तय थी. इस दौरान भाजपा नेता व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मौजूद हैं. शाह व नीतीश की यह मुलाकात 2019 चुनाव के मद्देनजर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे के मद्देनजर अहम है. जदयू चाहता है कि उसे 2009 लोकसभा चुनाव के फार्मूले से सीटें मिले. तब जदयू 25 लोकसभा सीटों व बीजेपी 15 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. लेकिन, 2014 के चुनाव में जदयू एनडीए से बाहर हो गया था. वर्तमान में बीजेपी के पास 22 सांसद हैं. ऐसे में सीटों का बंटवार एक मुश्किल कवायद है. इस गंठबंधन में एलजेपी व रालोसपा जैसी पार्टियां भी हैं और बिहार सीटें मात्र 40 है.

    2019

    2019 के लिए अमित शाह की नीतीश कुमार के साथ बैठक कितनी अहम है?

    नयी दिल्ली : पटना में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार की मुलाकात पर आज हर किसी की नजरें टिकी हैं. एक महीने के अंतराल पर अमित शाह की यह एनडीए के एक और अहम सहयोगी से दूसरी मुलाकात है. इससे पहले वे मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिले थे. भारतीय जनता पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव 2019 का मैदान 2014 की तरह बेहद आसान नहीं है. तब यूपीए सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से सत्ता में होते हुए ही आखिरी सासें लेती साफ दिख रही थी. अन्ना हजारे के आंदोलन व अरविंद केजरीवाल के बेहद आक्रामक प्रेस कान्फ्रेंस ने यूपीए दो के अंतिम सालों में सत्ता के विरोध में एक जन मानस तैयार किया था. अब कांग्रेस न तो केंद्र में है और न राज्यों में ( अपवाद छोड़ कर) में. इसके उलट भाजपा चार साल से केंद्र में सत्ता में है व 20 राज्यों में भाजपा के सरकार में होने या उसके साझेदार होने के बाद एंटी इन्कंबेंसी का फैक्टर कुछ न कुछ तो है ही.

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