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    जीवनरक्षक

    जीवनरक्षक है कॉर्ड ब्लड सेल्स

    गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए गर्भनाल महत्वपूर्ण अंग है. यह बच्चे को मां से कनेक्ट करती है. इसीके जरिये गर्भ में बच्चे का ब्लड सर्कुलेशन होता है और मां से पोषण मिलता है. बच्चा जब पैदा होता है, तो कार्ड को काट दिया जाता है.

    सहज

    सहज शंख मुद्रा से दूर होगी तुतलाहट

    यह मुद्रा शंख मुद्रा का सरल रूप है. इस मुद्रा से बवासीर (piles) दूर होता है. जब गुदाद्वार के आसपास छाले उत्पन्न हों, तो उसे फिशर कहा जाता है. छाले उत्पन्न होने का मुख्य कारण है कब्ज. सहज शंख मुद्रा के प्रयोग से तुतलाना बंद होता है. जो बच्चे तुतलाते हैं, उन्हें इस मुद्रा के अभ्यास से लाभ होता है. इस मद्रा से सभी स्वर दोष दूर होते हैं. इससे गले के रोग भी ठीक होते हैं तथा आवाज मधुर बनती है.

    पेट

    पेट संबंधी विकारों को दूर करता है मयूरासन

    मयूर सभी प्रकार के कीड़े-मकोड़े, यहां तक कि विषैले सर्प को भी खा लेता है. उसी प्रकार मयूरासन के अभ्यास से शरीर के सभी विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और पाचन शक्ति अत्यधिक सक्रिय हो जाती है. मयूरासन योगासन की उच्च श्रेणी में शामिल है. अनेक प्रसिद्ध ग्रंथों में इस आसन का वर्णन है.

    रोजाना

    रोजाना दो बार करें ब्रश नहीं तो पड़ जाएंगे फेरे में

    ओरल केयर का मतलब है, मुंह की देखभाल. मुंह के सबसे अभिन्न अंग हैं दांत, जिसे मसूड़े जकड़ कर रखते हैं और जीभ. अत: दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी है. हममें से 90 प्रतिशत लोग डेंटिस्ट के पास तभी जाते हैं, जब दांतों में असहनीय दर्द हो. भारत में कैंसर से ग्रसित मरीजों में 30 प्रतिशत लोग मुंह के कैंसर से जूझ रहे हैं. पुरुषों में होनेवाली यह सबसे से खतरनाक बीमारी है.

    पेट

    पेट रोगों में गरुड़ मुद्रा है फायदेमंद

    पेट संबंधी रोग हृदय और रक्त विकार का भी कारण बनते हैं. पेट संबंधी सभी रोगों में गरुड़ मुद्रा अत्यंत उपयोगी है. इससे शरीर में ऊर्जा और प्राणशक्ति का संतुलन स्थापित होता है. यह पेट के निचले हिस्से से लेकर कंधे तक की सभी कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों को ऊर्जा प्रदान करता है. इससे पूरे शरीर में रक्तसंचार तेज होता है.

    स्लिप

    स्लिप डिस्क से छुटकारा दिलाता है गरुड़ासन

    अच्छा स्वास्थ्य संपूर्ण सुखों का आधार है. स्वस्थ वह है, जो कफ, पित्त व वात के त्रिदोषों से मुक्त है और जिसकी जठराग्नि सम है. स्वस्थ शरीर वही है, जिसमें सप्ताधातुएं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा तथा वीर्य) उचित अनुपात में हो. मलमूत्र की क्रिया सम्यक प्रकार से होती हो और 10 इंद्रियां (कान, नाक, आंख, त्वचा, रचना, गुदा, उपस्थ, हाथ, पैर एवं जिह्वा) ठीक से काम कर रहे हों.

    प्रेग्नेंसी

    प्रेग्नेंसी से पूर्व ही आहार में शामिल करें फॉलिक एसिड

    महिलाओं के लिए खान-पान के लिहाज से किशोरावस्था व युवावस्था अहम हैं. इस दौरान सही खान-पान से प्रेग्नेंसी में होनेवाली समस्याओं को कम किया जा सकता है. अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट और विटामिन्स के साथ फॉलिक एसिड और कैल्शियम को जरूर शामिल करें.

    स्टेटिन

    स्टेटिन से हो सकता है डायबिटीज का खतरा

    एक स्टडी में कहा गया कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान मोटापे की समस्या झेल रही होती हैं, उनसे जन्म लेने वाले बच्चे को आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. वहीं, एक नयी स्टडी में दावा किया गया है कि स्टेटिन ग्रुप की दवा लेने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा दोगुना हो जाता है. दरअसल, स्टेटिन ग्रुप की दवा उपयोग शरीर में कोलेस्ट्रॉल को स्तर कम करती है. कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा आर्टरी में प्लाक जमाने का काम करता है, जो हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है.

    प्रोबायोटिक

    प्रोबायोटिक मॉनसून में भी फायदेमंद, जानें इससे होने वाले लाभ

    तपती गर्मी के बाद मानसून की फुहारें हर किसी के चेहरे पर चमक और होठों पर मुस्कान ला देती हैं. हालांकि, इस मौसम में सावधानी न बरती जाये, तो कई बीमारियां भी दस्तक दे सकती हैं.

    शरीर

    शरीर में टॉक्सिन्स की अधिकता मुहांसों का कारण, जानें रोकथाम और बचाव के उपाय

    मुंहासा त्वचा संबंधी विकार है, जो युवाओं में अधिक देखने को मिलता है. इसे एक्ने भी कहा जाता है. शरीर में विषाक्त पदार्थों की अधिकता से इस तरह की समस्या अधिक देखी जाती है.

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