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Bengal Election 2021: पोस्टल बैलट के लिए आवेदन के आखिरी दिन डीजीपी ने जारी किया आदेश, पुलिस वालों में आक्रोश

By Prabhat khabar Digital
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आखिरकार खुली बंगाल डीजी की नींद
आखिरकार खुली बंगाल डीजी की नींद
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Bengal Election 2021: पुलिस के पोस्टल बैलट को लेकर पहले से ही विपक्षियों ने आशंका जाहिर की थी. आरोप था कि पोस्टल बैलट चोरी हो सकता है. पुलिस पोस्टल बैलट को लेकर अभी तक विपक्षी नेताओं की शंका दूर नहीं हुई है. वहीं, सोमवार को मामले ने तूल पकड़ लिया. दरअसल, इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आया, जब सोमवार को राज्य के डीजीपी ने ई-मेल के जरिए एक मैसेज राज्य के सभी पुलिस विभागों के प्रमुखों (एसपी, सीपी, एसआरपी सहित कोलकाता पुलिस) को भेजा और उनसे उन सभी पुलिसकर्मियों की संख्या देने को कहा, जो पोस्टल बैलट के जरिए वोट डालने को इच्छुक हैं.

ईमेल से बढ़ी पुलिसकर्मियों में टेंशन...  

इस मैसेज ने पुलिसकर्मियों के असंतोष को एक तरह से बढ़ावा दिया है. जानकारी के मुताबिक, सोमवार को ही राज्य के डीजीपी वीरेंद्र की तरफ से एक मैसेज एडीजी लाॅ एंड ऑर्डर ने बंगाल और कोलकाता पुलिस मुख्यालय को भेजा है, जिसमें बताया गया है कि वोट देने के लिए इच्छुक पुलिसकर्मियों की सूची उन्हें भेजी जाये. दरअसल, इस मैसेज को लेकर उस वक्त चर्चा शुरू हो गयी जब पुलिसकर्मियों की सूची जमा करने की अंतिम तारीख सोमवार ही रही और समय दोपहर 1 बजे तक ही था.

वाम मोर्चा के कदम पर तृणमूल सरकार

इतने कम समय में लिस्ट भेजने के लिए भेजे गये मैसेज ने पुलिसकर्मियों में फिर एक असंतोष पैदा कर दिया है. नाम नहीं जाहिर करते हुए एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस मैसेज से यह साफ जाहिर है कि पुलिस प्रशासन भी नहीं चाहता है कि पुलिस वोट दें. अगर प्रशासन चाहता कि पुलिस अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें तो समय बढ़ाई जाती. वर्तमान सरकार वाममोर्चा के नक्शे कदम पर चल रही है.

वाम मोर्चा के सरकार में क्या थी स्थिति? 

वाम मोर्चा के शासन में पुलिस के पोस्टल बैलट से सरकार को ही वोट दे दिया जाता था. जिससे पुलिसकर्मियों को वोट के इस्तेमाल का मौका नहीं मिलता था. 2011 तक पुलिस एसोसिएशन ही पुलिस के लिए पोस्टल बैलट का आवेदन जमा करती थी. पोस्टल बैलट से खुद सरकार के पक्ष में वोट डाल देती थी. साल 2011 में जब ममता बनर्जी की सरकार बनी तब इस सरकार ने पुलिस एसोसिएशन को भंग कर दिया था.

2020 में अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह

इसके बाद ही चुनावी ड्यूटी में रहने के कारण पुलिसकर्मियों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल भी करने का मौका ही नहीं मिलता था. कुछ ही पुलिसकर्मी वोट दे पाते थे. 90 प्रतिशत पुलिसकर्मी अपना वोट नहीं दे पाते थे. हालांकि, साल 2020 के मई महीने में कोलकाता पुलिस के काॅम्बैट फोर्स ने अपने ही सीनियर अधिकारी के खिलाफ पहली बार विद्रोह कर दिया था.

वेलफेयर बोर्ड पर पुलिस का बड़ा आरोप 

इस घटना के बाद ही जूनियर पुलिसकर्मियों की शिकायतें सुनने के लिए पुलिस वेलफेयर बोर्ड बनाया गया. इस वेलफेयर बोर्ड का काम पुलिसकर्मियों की शिकायतों को सरकार तक पहुंचाना है. मगर आरोप है कि वेलफेयर बार्ड सभी पुलिसकर्मियों के वोटर आइडी कार्ड और आधार कार्ड ले रहा है, ताकि उनके वोटों का इस्तेमाल सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए किया जा सके.

पोस्टल बैलट की चोरी तब तक संभव नहीं 

कुछ अधिकारियों का कहना है कि पोस्टल बैलट की चोरी तब तक संभव नहीं जब तक की कोई पुलिसकर्मी आवेदन नहीं करता है. अगर कोई पुलिसकर्मी वोट के लिए पोस्टल बैलट के लिए आवेदन करता है और इसके बाद उसका पोस्टल बैलट आ जाता है. लेकिन वह उसे रिसिव नहीं कर पाता है तब उस दौरान पोस्टल बैलट की चोरी की संभावना होती है. वहीं प्रत्येक चुनाव के 7 दिन पहले पोस्टल बैलेट आता है और वोट देने के 3 दिनों के भीतर उस पुलिसकर्मियों को अपना वोट पोस्ट करना पड़ता है.

Posted by : Babita Mali

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Published Date

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