मालदा मेडिकल कॉलेज का एडीएम ने किया दौरा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Nov 2016 2:00 AM

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मालदा. मालदा मेडिकल कॉलेज के सुंदरीकरण और चिकित्सा का बेहतर परिवेश तैयार करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू किये हैं. इस सिलसिले में गुरुवार सुबह करीब आठ बजे मेडिकल कॉलेज का दौरा करने अतिरिक्त जिला अधिकारी (एडीएम) आर विमला पहुंचीं. उनके साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी थे. साथ में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और […]

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मालदा. मालदा मेडिकल कॉलेज के सुंदरीकरण और चिकित्सा का बेहतर परिवेश तैयार करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू किये हैं. इस सिलसिले में गुरुवार सुबह करीब आठ बजे मेडिकल कॉलेज का दौरा करने अतिरिक्त जिला अधिकारी (एडीएम) आर विमला पहुंचीं. उनके साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी थे.

साथ में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और मेडिकल के उपाधीक्षक डॉ ज्योतिष चंद्र दास मौजूद थे. उल्लेखनीय है कि मालदा मेडिकल कॉलेज की रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन की जिम्मेदारी जिला अधिकारी शरद द्विवेदी को दी गयी है. यह जिम्मेदारी मिलने के बाद श्री द्विवेदी गत 30 अक्तूबर को मेडिकल कॉलेज के हालात का जायजा लेने पहुंचे थे. प्रसूति विभाग में वह काफी देर तक रुके थे. अन्य वार्डों को भी उन्होंने घूमकर देखा था. बाद में उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ एक बैठक भी की थी.

आगामी 7 नवंबर को रोगी कल्याण समिति की बैठक बुलायी गयी है. इससे पहले जिला अधिकारी मालदा मेडिकल में खामियों और समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं. इसी को ध्यान में रखकर गुरुवार को अतिरिक्त जिला अधिकारी ने मालदा मेडिकल कॉलेज का दौरा किया.
मेडिकल कॉलेज सूत्रों ने बताया कि यहां की सबसे बड़ी समस्या है चहारदीवारी, जल निकासी व्यवस्था और सड़क. अभी मालदा मेडिकल कॉलेज की कोई चहारदीवारी नहीं है. इसके चलते छोटी-बड़ी गाड़ियां बेरोक-टोक मेडिकल कॉलेज में घुसती रहती हैं. यहां कई अवैध गैरेज खुल गये हैं. जन निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी बारिश होने पर भी मेडिकल कॉलेज में घुटनों तक पानी भर जाता है. कई बार तो वार्डों के भीतर तक पानी घुस आता है. चारों तरह कूड़ा-कचरा और जंगल लगा हुआ है.

इसके चलते सांप और कीड़ों-मकोड़ों का आतंक रहता है. कुछ दिन पहले इमरजेंसी के सामने एक रोगी के रिश्तेदार को सांप ने काट लिया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था. इतना ही नहीं, मालदा मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का भारी दबाव है. लेकिन इसके अनुरूप पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं है. मेडिकल कॉलेज में 164 डॉक्टर शिक्षक हैं. इनमें से ज्यादातर सप्ताह में दो-एक दिन से ज्यादा नहीं रहते हैं. परिणामस्वरूप किसी मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे बाहर रेफर करना पड़ता है. मेडिकल कॉलेज बने पांच साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कर्मचारियों की भरती नहीं हुई है.

इधर अतिरिक्त जिला अधिकारी आर विमला ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में जो भी समस्याएं हैं, उनकी सूची तैयार कर उचित कदम उठाये जायेंगे. आगामी 7 नवंबर को रोगी कल्याण समिति की बैठक के बाद काम शुरू हो जायेगा.
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