बढ़ते प्रदूषण ने एक पैरा टीचर की बढ़ाई चिंता
सिलीगुड़ी: लगातार बढ़ रहे प्रदूषण तथा इसके खतरे को देखते हुए एक शिक्षक इतने चिंतित हुए कि उन्होंने साइकिल से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का बीड़ा उठा लिया. दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर थाना अंतर्गत श्रीपुर शिक्षा चरण हाई स्कूल में पैरा टीचर के तौर पर नियुक्त 38 वर्षीय राम प्रसाद नस्कर पर्यावरण […]
सिलीगुड़ी: लगातार बढ़ रहे प्रदूषण तथा इसके खतरे को देखते हुए एक शिक्षक इतने चिंतित हुए कि उन्होंने साइकिल से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का बीड़ा उठा लिया. दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर थाना अंतर्गत श्रीपुर शिक्षा चरण हाई स्कूल में पैरा टीचर के तौर पर नियुक्त 38 वर्षीय राम प्रसाद नस्कर पर्यावरण बचाने का संदेश लेकर पूरे देश की साइकिल से यात्रा कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वह साइकिल यात्रा निकाल कर सिर्फ आम लोगों को जागरूक कर रहे हैं, बल्कि सरकारी महकमा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से भी मुलाकात कर उनसे प्रदूषण को रोकने के लिए कठोर कार्रवाई किये जाने की मांग करते हैं.
श्री नस्कर इन दिनों गंगा सागर से दार्जिलिंग के लिए साइकिल यात्रा पर निकले हैं. फांसीदेवा से होकर दार्जिलिंग जाने के क्रम में सिलीगुड़ी में उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत की. श्री नस्कर ने कहा कि वह वर्ष 2010 से ही साइकिल की यात्रा कर रहे हैं. 2013-14 में उन्होंने अंडमान निकोबार तथा लक्ष्यद्वीप को छोड़कर पूरे देश की यात्रा की. वह जहां-जहां से भी गुजरे, उस राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालयों में जाते रहे. अधिकारियों से मुलाकात कर प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कठोर कदम उठाने की उनसे मांग की.
उन्होंने आगे कहा कि वह एक बार फिर से पर्यावरण संरक्षण का पैगाम लेकर साइकिल से यात्रा पर निकले हैं. एक बार पूरे देश की यात्रा कर ली, तो इसका मतलब यह नहीं कि उनका यह अभियान शुरू हो गया है. वह जीवन भर साइकिल यात्रा के जरिये देश की सेवा करते रहेंगे. श्री नस्कर ने आगे बताया कि ऐसे कई लोग हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को लेकर मोटरसाइकिल से यात्रा पर निकलते हैं. वास्तविकता यह है कि मोटरसाइकिल से प्रदूषण को ही बढ़ावा मिलता है.
वह भी चाहते तो मोटरसाइकिल से ही अपनी यह यात्रा कर सकते थे. लेकिन इसका कोई लाभ नहीं होता. वह एक तरह से प्रदूषण बढ़ाने में अपना योगदान करते. साइकिल एक शानदार सवारी है. इससे प्रदूषण को कोई खतरा नहीं है. इतना ही नहीं, साइकिल यात्रा से व्यायाम भी हो जाता है. वह आम लोगों को भी साइकिल की सवारी के लिए प्रोत्साहित करते हैं. साइकिल की सवारी से तन-मन दोनों स्वस्थ होता है और पर्यावरण को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता. अपने परिवार के संबंध में श्री नस्कर ने बताया कि उनकी मां, पिता तथा पत्नी तीनों ही इस काम में उनका साथ देते हैं. पिता सोमेनचन्द्र नस्कर तथा मां गीताबाला नस्कर का साथ उन्हें शुरू से ही मिलता रहा है.