सियासत. सिलीगुड़ी निगम के बोर्ड मीटिंग में विरोधी दल ने उठाये कई मुद्दे
मेयर को किया कठघरे में खड़ा
लगाया अधूरी जानकारी देने का आरोप
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम में गुरूवार को आयोजित बोर्ड मीटिंग के दौरान विरोधी दल के तणमूल कांग्रेस (तृकां) नेता व 20 नंबर वार्ड के पार्षद रंजन सरकार उर्फ राणा दा ने वाम बोर्ड के समक्ष कई महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाये. लेकिन मेयर को तेवर तृकां के एक अन्य पार्षद (वार्ड नंबर 37) व रंजनशील शर्मा ने दिखाया. हुआ यूं कि राणा दा के प्रस्तावों व सभी सवालों का जवाब देकर जैसे ही मेयर अशोक भट्टाचार्य अपनी कुरसी पर बैठे,तो राणा दा ने कोई सवाल नहीं उठाया.
लेकिन रंजनशील शर्मा ने चेयरमैन दिलीप सिंह से एक बात बोलने की अनुमति लेकर मेयर को कटघरे में खड़ा कर दिया. श्री शर्मा ने जब बोलना शुरू किया तो वह बहुत दिनों के बाद आज पुराने रंगत में नजर आये और अपने चिरपरिचित अंदाज में राणा दा के सभी सवालों का जवाब न देने एवं अधूरी जानकारी देने का आरोप मेयर पर लगाया. श्री शर्मा ने कहा कि निगम में गैर-कानूनी तरीकों से अधिकारियों व इंजीनियरों के अलावा हर दिन बेवजह विभिन्न पदों पर नियुक्तियां हो रही है.
उन्होंने मेयर पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ मेयर विकास और नागरिक परिसेवा के नाम पर आर्थिक कमी व ममता सरकार पर आर्थिक सहयोग न करने का रोना रोते हैं और दूसरी तरफ गैर-कानूनी तरीके से बेवजह नियुक्तियां कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पीएचइ का मामला पूरी तरह राज्य सरकार के नियंत्रण में होता है. तो फिर नये तरीके से पीएचइ इंजीनियर की निगम में नियुक्ति की क्या जरूरत है. उन्होंने मेयर से राणा दा के एक और सवाल अब-तक कितने पदों और कुल कितने युवक-युवतियों को नौकरी पर रखा गया इसकी सटीक जानकारी देने की मांग की.
मेयर ने स्वीकारी गलती: रंजनशील शर्मा द्वारा लगाये गये आरोपोंपर मेयर अशोक भट्टाचार्य ने जवाब न देने गलती मान ली और इसके लिए चेयरमैन व सभी से माफी भी मांगी.
उन्होंने गैर-कानूनी तरीके से नियुक्ति के मामले में अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि जब से वाम बोर्ड हुई है नियुक्ति ही नहीं किसी भी मामले में कोई गैर-कानूनी या फिर किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि करीब बीस वर्ष पुराने पीएचइ इंजीनियर के रिटायर होने की वजह से ही नये इंजीनियर व अन्य विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए पहले मीडिया में विज्ञापन प्रकाशित किया गया. करीब तीन हजार युवक-युवतियों का परीक्षा सेंट्रल इंस्पेक्टर की निगरानी में हुआ. कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.
जरूरत के अनुसार ही युवक-युवतियों को नियुक्त किया गया है. श्री भट्टाचार्य ने विरोधी पार्षदों को उनके ही लहजे में करारा जवाब देते हुए कहा कि पिछले दिनों ममता सरकार के पीएचइ इंजीनियरों और अधिकारियों की लापरवाही के वजह से ही पूरे निगम क्षेत्र में आम जनता कई दिनों तक जल संकट से परेशान रहे. बाद में निगम में नियुक्त नये इंजीनियर ने ही इस तरह के संकट की घड़ी में वैकल्पिक मार्ग निकाल कर इसकी रूपरेखा बनाकर निगम को दी है.
भाजपा पार्षद के सवालों पर सभी दी थपकी: आठ नंबर वार्ड की भाजपा पार्षद खुशबू मित्तल के भी सवालों पर सभी ने थपकी बजाकर अपनी सहमति दी. इस दौरान केवल तृकां या कांग्रेस पार्षद ही नहीं बल्कि कई वाम बोर्ड के पार्षद भी मेज पर थपकी बजाते अपना समर्थन देते दिखे.
श्रीमती मित्तल ने अपने सवाल में मेयर से काउंसिलर डवलपमेंट फंड की प्रक्रिया के नियम-कानूनों में फेर-बदल कर इसे सहज करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि निगम के वर्तमान नियम के तहत जो फंड मिलता है उससे वार्ड के विकास करने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं. मात्र एक लाख का टेंडर जारी किये जाने के कारण कोई भी ठेकेदार काम नहीं लेना चाहता. श्रीमती मित्तल ने मेयर को सुझाव देते हुए कहा कि पुराने नियम की जगह पार्षदों को पहले अपने वार्ड का विकास करने की अनुमति दी जाये. काम पूरा होने पर जब पार्षद बिल निगम में जमा करे तभी वह रकम लौटायी जाये.
इससे पहले निगम वार्ड में हो रहे काम का जायजा भी ले. निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों को साइट पर भेजकर काम का पूरा ब्यौरा लिखित रूप से भी ली जाये. इससे वार्ड का विकास करने और काम करने में पार्षदों को काफी सहुलियत होगी. इसके जवाब में मेयर अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि इस नियम से ऑडिट में दिक्कतें आयेंगी.
इसका तुरंत जवाब देते हुए श्रीमती मित्तल ने कहा कि वार्ड उत्सव में इसी तर्ज पर पार्षद उत्सव आयोजन के बाद निगम में बिल पेश करते हैं और उसके बाद ही बिल पास होता है तब क्या ऑडिट में दिक्कतें नहीं आती. इस पर मेयर ने कहा कि इसके लिए पहले मीटिंग की जायेगी तभी इसपर सभी की राय के बाद ही उचित निर्णय लिया जायेगा.
