एनजेपी स्टेशन पर खड़ी यशवंतपुर-कामख्या ट्रेन में पेंट्रीकार के अचानक बंद हो जाने से दोपहर के खाने और पीने के पानी के लिए यात्री को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. खासकर मरीजों के परिजनों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. कैंसर व किडनी रोग से ग्रस्त जमालुद्दीन शेख (64) के लड़के साइतउर रहमान ने बताया कि वह लोग असम के धुबड़ी जिले के विलासीपाड़ा के रहनेवाले हैं. अब्बा (पिताजी) का चेन्नई में इलाज करवाकर लौट रहे हैं.
अगर मालूम होता कि ट्रेन बीच रास्ते में ही जहां-तहां रोक दी जायेगी, तो वह पिताजी को हवाई मार्ग से ही लेकर असम लौटते. उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी खाने-पीने को लेकर है. सुबह पेंट्रीकार वालों ने नाश्ता जरूर दिया था. लेकिन सुबह नौ बजे से अचानक आना ही बंद कर दिया. वह कोच भी पूरी तरह बंद है. पिताजी को समय पर खाना-पीना और दवा-दारू देने की जरूरत है और बार-बार वह पिताजी को अकेले छोड़कर प्लेटफॉर्म पर भी नहीं जा सकते. इस लिए खानेपीने की काफी ज्यादा तकलीफ हो रखी है. इसी तरह की परेशानी अन्य यात्रियों के साथ भी हो रखी है.
स्टेशन मैनेजर का दावा
एनजेपी स्टेशन के मैनेजर अजितेश दास ने दावे के साथ कहा कि यशवंतपुर-कामख्या ट्रेन में पेंट्रीकार बंद नहीं है. हो सकता है कुछ समय के लिए पेंट्रीकार वालों ने आराम करने के इरादे से सेवा बंद रखा हो. खाने-पीने के पर्याप्त साधन हैं और स्टेशन के फूडप्लाजा और जनाहार भी चल रहा है. बोडो आंदोलन के मद्देनजर खाने-पीने की अतिरिक्त व्यवस्था यहां रखी गयी है.
