जिले के 70 फीसदी आम बागानों में टूटा 70 साल का रिकार्ड
मालदा : उत्तरबंगाल में इस बार जाड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. इस वजह से आम के पेड़ों में मंजरियां कम लग रही हैं. इससे आम उत्पादक किसान चिंतित हैं. उल्लेखनीय है कि फरवरी के मध्य तक आम के पेड़ों में मंजरियां पकड़ लेती हैं.
लेकिन इस साल तुलनात्मक रुप से मंजरियां कम हैं. आम उत्पादक किसानों के एक वर्ग का मानना है कि मंजरियांनहीं पकड़ने से इस बार आम के उत्पादन में कमी हो सकती है. उल्लेखनीय है कि इस साल जिले के 31 हजार हेक्टेयर जमीन में आम की फसल लगी है. वर्ष 2019 में तीन लाख 70 हजार मेट्रिक टन आम की उपज हुई थी.
आम उत्पादक किसानों का कहना है कि जनवरी माह के समाप्ति पर पेड़ों में मंजरियां लग जातीं थीं. यहां तक कि मंजरियों में आम की कैरी भी बनने लगती थी. गौरतलब है कि आम गर्म माहौल में पैदा होता है. फिलहाल जाड़ा कायम है और पश्चिमी हवा नहीं बह रही है.
बागवानी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि मंजरी लगने के लिये अभी भी समय है. इसके अलावा कीड़ा लगने के सिवा आम के पेड़ों में कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिये.
