अलीपुरद्वार : गैंडे के शिकार के छह दोषियों को पांच साल की कैद

सींग तस्करी में दो सहयोगियों को तीन साल की सजा दोषियों में बानरहाट का एक शिक्षक, एक सिलीगुड़ीवासी जलदापाड़ा नेशनल पार्क में मारा गया था गैंडे को अलीपुरद्वार एसीजेएम ने केवल डेढ़ साल में सुनायी सजा अलीपुरद्वार : जलदापाड़ा नेशनल पार्क में एक गैंडे के शिकार के आरोप में बानरहाट के एक शिक्षक समेत छह […]

  • सींग तस्करी में दो सहयोगियों को तीन साल की सजा
  • दोषियों में बानरहाट का एक शिक्षक, एक सिलीगुड़ीवासी
  • जलदापाड़ा नेशनल पार्क में मारा गया था गैंडे को
  • अलीपुरद्वार एसीजेएम ने केवल डेढ़ साल में सुनायी सजा
अलीपुरद्वार : जलदापाड़ा नेशनल पार्क में एक गैंडे के शिकार के आरोप में बानरहाट के एक शिक्षक समेत छह लोगों को पांच साल की कैद की सजा सुनायी गयी है. यह सजा अलीपुरद्वार एसीजेएम-1 की अदालत ने दी.वहीं सींग तस्करी में मदद के आरोप में दो और लोगों को दोषी करार देते हुए तीन साल की जेल की सजा दी गयी है. गिरफ्तारी के महज डेढ़ साल के अंदर अदालत का फैसला आ जाने से वन विभाग में खुशी है.
बता दें कि 6 फरवरी 2018 को जलदापाड़ा नेशनल पार्क के कोदालबस्ती रेंज के बड़ाडाबरी एक नंबर कंपार्टमेंट के जंगल में एक पूर्णवयस्क गैंडे का शिकार किया गया था. शिकार में प्रमुख भूमिका निभायी थी मणिपुर के कुख्यात अवैध शिकारी मार्त रीबा ने.
इसमें कोदालबस्ती निवासी राजू राभा, रूपेश राभा, राजीव राभा, सिलीगुड़ी के राजू लामा और बानरहाट के शिक्षक सेवक कामी ने सहयोग किया था. शिकार के बाद गैंडे की सींग की तस्करी में शालकुमार के विमल कार्जी और मदारीहाट के गोपाल सिंह ने मदद की थी. इन लोगों ने शिकार में चीन से मंगाये जहर से बुझी गोली का इस्तेमाल किया था.
गैंडे के शिकार का पता चलने के बाद जलदापाड़ा वन डिवीजन के कर्मचारियों ने जांच शुरू की और 7 फरवरी 2018 को सींग के साथ सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया. इन सभी के खिलाफ वन्यजीवन संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज कर अलीपुरद्वार एसीजेएम-1 की अदालत में पेश किया गया था. बुधवार को इस मामले में अदालत का फैसला आ गया.
जो छह लोग सीधे तौर पर गैंडे के शिकार से जुड़े थे उन्हें पांच साल की कैद और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी गयी है. तस्करी में दो सहयोगियों को तीन साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गयी. इस संबंध में सरकारी पक्ष के वकील दुलाल घोष ने कहा कि उन्होंने काननू में उल्लेखित सात साल की सर्वोच्च सजा का अनुरोध अदालत से किया था.
लेकिन अदालत ने छह लोगों को पांच और दो लोगों को तीन साल कैद की सजा सुनायी. वहीं जलदापाड़ा वन डिवीजन के डीएफओ कुमार विमल ने कहा, ‘इस फैसले के बाद अवैध शिकारी ऐसी किसी हरकत से पहले दस बार सोचेंगे. वन विभाग की ताकत उन्हें समझ में आयेगी. वनकर्मियों का भी इससे उत्साह बढ़ा है और वे लोग बेहतर ढंग से जंगलों की रक्षा कर पायेंगे.’

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