तालाब में दिखा पुराने जमाने की सड़क के अवशेष

बालुरघाट : पुराने जमाने के बहुत सारे अवशेष और चिह्न रहस्य और रोमांच की मिट्टी के नीचे दबे पड़े हैं जिनकी खोज होने से इतिहास की कई परतें उभरकर सामने आ सकती हैं. इसी तरह का एक अवशेष दक्षिण दिनाजपुर जिला सदर बालुरघाट शहर से करीब 12 किमी दूर धरमपुर गांव में मिला है जिसको […]

बालुरघाट : पुराने जमाने के बहुत सारे अवशेष और चिह्न रहस्य और रोमांच की मिट्टी के नीचे दबे पड़े हैं जिनकी खोज होने से इतिहास की कई परतें उभरकर सामने आ सकती हैं. इसी तरह का एक अवशेष दक्षिण दिनाजपुर जिला सदर बालुरघाट शहर से करीब 12 किमी दूर धरमपुर गांव में मिला है जिसको लेकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता पैदा हो गयी है.
हुआ यों कि बालुरघाट सदर ब्लॉक के जलघर ग्राम पंचायत अंतर्गत धरमपुर में एक तालाब है जिसका जलस्तर कम होते ही वहां पुराने जमाने की सड़क के अवशेष निकल आये हैं जिसे देखने के लिये सैकड़ों की संख्या में लोग रोज आ रहे हैं. शुक्रवार को ली गयी तस्वीर में तालाब के एक हिस्से में ईंट की सड़क स्पष्ट रुप से देखी जा सकती है.
शुक्रवार की सुबह तालाब का पानी कम होते ही उसकी तस्वीर ली गयी लेकिन शाम को जलस्तर अचानक बढ़ जाने से सड़क का बड़ा हिस्सा पानी में समा गया है. इस तालाब को लेकर वैसे स्थानीय लोगों में कई जनश्रुतियां हैं जो मिथकीय कथाएं लगती है.
आज सुबह सुबह की सैर करने के दौरान स्थानीय लोगों की नजर तालाब के सूखे हुए हिस्से पर पड़ी तो उन्होंने वहां ईंटों की एक सड़क देखी. कई लोग पता लगाने के लिये तालाब में उतर पड़े. उन्होंने देखा कि सड़क पर घोड़ों के पैरों की छाप भी है. सड़क तालाब के बहुत गहरे में चली गयी है.
उल्लेखनीय है कि सोन नदी के भीतर भी इसी तरह से शेरशाह के जमाने की ग्रैंड ट्रंक रोड के अवशेष मिलने की खबर एक दो साल पहले आयी थी. स्थानीय लोगों ने इस तालाब से संबंधित कई रहस्यजनक बातें भी बतायी हैं. इनमें से एक यह भी है कि इस तालाब के पानी को सुखाने के लिये कई बार प्रयास हुआ. लेकिन कभी भी इस काम में पूरी सफलता नहीं मिली.
कुछ देर तक तालाब में पानी कम होने के बाद फिर वह पहले की स्थिति में आ जाता है. स्थानीय लोगों में एक विश्वास है कि इस तालाब में गरीब घर का कोई व्यक्ति तालाब से बर्तन मांगता तो उसे बर्तन से भरी बोरी तैरती हुई मिलती.
उसके बाद वह आदमी काम पूरा हो जाने के बाद फिर बर्तनों से भरी बोरी को तालाब में डाल देता जिसके बाद वह गायब हो जाती.
कुछ लोगों को यह भी कहते हुए सुना गया है कि प्राचीन काल में बानासुर राजा घोड़े पर सवार होकर सैर के लिये इस इलाके में निकलते थे. पौराणिक कथा के अनुसार वाणासुर की राजधानी असम के शोणितपुर जिले में थी. इस राज्य की सीमा उत्तर बंगाल तक माना गया है.
स्थानीय निवासी अमित सरकार ने बताया कि आज अचानक तालाब में ईंट की पुरानी सड़क देखने को मिली. यह सड़क तालाब के एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर गहरायी में मुड़ गयी है. इस इलाके से संबंधित बहुत सी जनश्रुतियां हैं जिनका संबंध इतिहास के एक विशेष कालखंड से है.
गांव के बूढ़े बुजुर्ग कई तरह की कथायें सुनाया करते थे. इस तालाब का कभी भी पूरी तरह सुखाया नहीं जा सका है. दूसरी ओर एक अन्य निवासी शोभा महंत ने बताया कि इस सड़क को पहले कभी नहीं देखा गया है. इसके पीछे इतिहास के विरल तथ्य छिपे हुए हो सकते हैं.
बालुरघाट प्रखंड की बीडीओ सुष्मिता सुब्बा ने बताया कि उन्होंने भी पहली बार मीडियाकर्मियों के माध्यम से ही सुना है. इसकी खोजबीन की जायेगी. जरूरी हुआ तो शीर्ष अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया जायेगा.

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