छात्रों को हो रही परेशानी

सिलीगुड़ी: सभी को अपनी-अपनी मातृभाषा प्यारी है. जन्म के बाद से ही मातृभाषा में बच्चे अपनी बातें सिखते हैं. इसलिए आगे चल कर बच्चों को अपनी मातृभाषा में ही पढ़ाई-लिखाई में आसानी होती है. जैसे बंगाली संप्रदाय के बच्चों के लिए बांग्ला माध्यम के स्कूलों में पढ़ाई आसान होती है, वहीं हिंदी भाषी बच्चों को […]

सिलीगुड़ी: सभी को अपनी-अपनी मातृभाषा प्यारी है. जन्म के बाद से ही मातृभाषा में बच्चे अपनी बातें सिखते हैं. इसलिए आगे चल कर बच्चों को अपनी मातृभाषा में ही पढ़ाई-लिखाई में आसानी होती है.

जैसे बंगाली संप्रदाय के बच्चों के लिए बांग्ला माध्यम के स्कूलों में पढ़ाई आसान होती है, वहीं हिंदी भाषी बच्चों को हिंदी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने में सुविधा होती है. बच्चे अगर अपने मातृभाषा में पढ़ाई करते हैं, तो उन्हें सबकुछ आसानी में समझ आ जाता है, और आगे चल कर वह किसी भी क्षेत्र में काबिल बन सकते हैं, अपने हूनर को दुनिया के सामने ला सकते हैं.

हालांकि अन्य भाषाओं खासकर अंग्रेजी का ज्ञान होना भी जरूरी है. बदलते जमाने के साथ साथ मातृभाषा के साथ अंग्रेजी भी सिखनी चाहिए. आजकल बांग्ला व हिंदी माध्यम से उच्च माध्यमिक में पढ़ाई के बाद बांग्ला व हिंदी भाषी छात्रों के लिए आगे अपनी भाषा में पढ़ाई करने का सौभाग्य प्राप्त नहीं होता है. उच्च माध्यमिक के बाद विज्ञान व वाणिज्य क्षेत्र में पढ़ाई के लिए बच्चे जिस कॉलेज में भी जाते हैं, वहां अंग्रेजी माध्यम होता है. सिलीगुड़ी में उच्च माध्यमिक परीक्षा के परिणाम आने के बाद विभिन्न कॉलेजों में दाखिले को लेकर मारामारी मची हुयी है.

इसी दौरान दाखिले की कोशिश में लगे कइ छात्र एवं छात्रओं ने बताया कि विज्ञान की पढ़ाई तो अंग्रेजी माध्यम के बिना हो ही नहीं सकती. सिलीगुड़ी कॉलेज में नामांकन की कोशिश में लगी एक छात्र स्नेहा सरकार ने बताया कि कॉलेजों में विज्ञान की लगभग सभी किताबें अंग्रेजी में होते हैं. सभी अच्छे लेखकों के किताब अंग्रेजी में ही होते हैं. बांग्ला में जो इक्का-दुक्का किताब है, वह शिक्षक पसंद नहीं करते है और बच्चों को उन किताबों के बारे में सुझाव भी नहीं देते हैं. ऐसे में जो बच्चे उच्च माध्यमिक तक अपनी पढ़ाई बांग्ला में किये हों, उनके लिए बड़ी मुश्किल हो जाती है. एक अन्य छात्र निशा के अभिभावक ने बताया कि उच्च माध्यमिक तक बंग्ला माध्यम में विज्ञान विभाग की पढ़ाई में बांग्ला भाषा में किताब मिल जाते हैं.

बाद में जब ये बच्चे कॉलेज में अपनी बीएससी व बीकॉम की पढ़ाई के लिए जाते हैं तो उन्हें अंग्रेजी किताब ही चुनना पड़ता है. ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ने में बहुत मुश्किल हो जाती है. इन विषयों पर शिक्षा प्रदान करने वाले कॉलेज के प्रोफेसर या प्राइवेट ट्यूटर भी बच्चों को अंग्रेजी में ही पढ़ाते हैं. सिलीगुड़ी के कइ अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को अंग्रेजी में सवालों के जवाब लिखने में मुश्किलें आती है. ऐसे भी बांग्ला व हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों की अंग्रेजी कमजोर होती है. इसलिए दिक्कत उन्हें ज्यादा आती है. इस तरह से अंग्रेजी में पढ़ाई के बोझ तले दब कर कइ छात्र छात्रओं के परीक्षा परिणाम खराब आते हैं.

आगे चल कर उनके लिए अच्छी सरकारी नौकरी पाना मुश्किल हो जाता है. कुछ बच्चें तो सिर्फ नाम के पास हो जाते हैं, लेकिन उसे ज्ञान प्राप्त नहीं होता है. कुछ बच्चे तो रट्टा मार कर पास हो जाते हैं. इस तरह के बच्चे आगे चल कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की हिम्मत खो देते हैं. इस तरह के बच्चे विज्ञान व वाणिज्य में पढ़ाई करने के बावजूद आगे चल कर आम लोगों की तरह ही कुछ आम नौकरियां करने लगते हैं. सिलीगुड़ी शहर के विभिन्न कॉलेजों व शिक्षा संस्थानों में ऐसे कई विद्यार्थी मिल जायेंगे, जो इस तरह के हैं. लोगों ने मांग की है कि विज्ञान व वाणिज्य विभाग में पढ़ाई करनेवाले बांग्ला माध्यम व हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के बारे में सोच कर विज्ञान की किताबें बांग्ला व हिंदी में मिलनी चाहिए.

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