दार्जिलिंग : न्यूनतम मजदूरी की मांग पर की गयी आवाज बुलंद

बैठक से पहले न्यूनतम मजदूरी की रकम बताये सरकार दार्जिलिंग : चाय श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिये जाने की मांग पर दार्जिलिंग क्षेत्र में नेहुर बालासन चाय बागान में शनिवार को गेट मीटिंग की गयी. मीटिंग में ज्वाइंट फोरम के दार्जिलिंग हिल कन्वेनर जेबी तमांग और अमर लामा की विशेष उपस्थिति रही. ज्वाइंट फोरम के […]

बैठक से पहले न्यूनतम मजदूरी की रकम बताये सरकार
दार्जिलिंग : चाय श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिये जाने की मांग पर दार्जिलिंग क्षेत्र में नेहुर बालासन चाय बागान में शनिवार को गेट मीटिंग की गयी. मीटिंग में ज्वाइंट फोरम के दार्जिलिंग हिल कन्वेनर जेबी तमांग और अमर लामा की विशेष उपस्थिति रही. ज्वाइंट फोरम के हिल के प्रवक्ता सुनील राई ने न्यूनतम मजदूरी के मसले का समाधान नहीं होने पर अफसोस जताया है.
उन्होंने कहा कि इसके पहले 2015 में उत्तरकन्या से एक अधिसूचना जारी की गयी थी, जिसमें न्यूनतम मजदूरी को आवश्यक बताया गया था. उसके बाद तीन साल तक बीच-बीच में बैठक होती रही, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रखा गया.
विगत 17 जुलाई को उत्तरकन्या में आयोजित बैठक में राज्य सरकार ने यह तय किया कि 30 जुलाई की बैठक में न्यूनतम मजदूरी की घोषणा की जायेगी. लेकिन 30 जुलाई को बैठक न होकर 6 अगस्त को हुई. इस बैठक में राज्य सरकार की तरफ से 172 रुपये न्यूनतम मजदूरी का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन इस प्रस्ताव पर चर्चा से पहले ही सरकार और मालिक पक्ष के प्रतिनिधि सभाकक्ष से बाहर चले गये.
सुनील राई ने बताया कि ज्वाइंट फोरम चार मुख्य बिंदुओं को लेकर आंदोलन कर रहा है. इसमें न्यूनतम मजदूरी के साथ ही चाय श्रमिकों के लिए जमीन का पट्टा, राशन के मद में श्रमिकों को प्रत्येक माह 660 रुपये भुगतान करने और बंद चाय बागानों को खोलने की मांगें शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि सुनने में आ रहा है कि आगामी 16 अगस्त को फिर राज्य सरकार बैठक बुलाने जा रही है, लेकिन उनके पास इस तरह की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है. सुनील राई ने कहा कि पहले राज्य सरकार न्यूनतम मजदूरी को लेकर अपना प्रस्ताव दे, जिसके बाद उस पर चर्चा होगी.
न्यूनतम मजदूरी पर खुशखबरी जल्द : विनय
दार्जिलिंग : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र से लेकर तराई व डुआर्स तक के चाय श्रमिकों को जल्द ही न्यूनतम मजदूरी से संबंधित खुशखबरी सुनने को मिलेगी. यह बात जीटीए प्रशासक बोर्ड के चेयरमैन विनय तमांग ने कही है. शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में श्री तमांग ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री से लगातार संपर्क में हैं, जिसका प्रतिफल अब चाय श्रमिकों को मिलने जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसकी भनक ज्वाइंट फोरम को भी मिल गयी है, इसलिए वे लोग श्रेय लेने के लिए हड़ताल आदि कर रहे हैं.
प्रेस विज्ञप्ति में विनय तमांग ने कहा है, ‘मैं हर दिन चाय श्रमिकों के बारे में राज्य सरकार के साथ बातचीत करता रहता हूं. श्रम मंत्री मलय घटक के साथ रोज ही बात होती है. कुछ दिन पहले अपने कोलकता भ्रमण के दौरान मैंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी बातचीत की थी.
इसके साथ ही मोर्चा का श्रमिक संगठन दार्जिलिंग तराई डुआर्स प्लांटेशन लेबर यूनियन भी सरकार के साथ निरंतर बातचीत करते आ रहा है, जिसका प्रतिफल शीघ्र ही श्रमिकों को मिलने जा रहा है.’
श्री तमांग ने कहा कि इन बातों की भनक मिलते ही ज्वाइंट फोरम द्वारा आंदोलन के नाम पर चाय बागानों को बंद कराया जा रहा है. लेकिन ज्वाइंट फोरम की इस तरह की मनमर्जी दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में नहीं चल पायी.
उनके राजनैतिक षड्यंत्र को पहाड़ के श्रमिकों ने विफल कर दिया है. श्री तमांग ने इसके लिए पहाड़ के श्रमिकों का आभार भी प्रकट किया है. उन्होंने कहा कि हड़ताल और बंद से सफलता नहीं मिलने के प्रमाण विगत के आंदोलनों से मिल चुके हैं. हरेक समस्या का समाधान टेबल पर बैठकर बातचीत के माध्यम से होगा. श्री तमांग ने कहा है कि वह न्यूनतम मजदूरी के लिए श्रमिकों को अग्रिम बधाई एवं शुभकामना देना चाहते हैं.

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