सीतारामपुर : कुल्टी नगरपालिका के मौजूदा बोर्ड की अवधि इसी माह समाप्त होने तथा नियत समय पर चुनाव नहीं होने से नगरपालिका में प्रशासक नियुक्ति के आसार बन गये हैं. नगरपालिका सूत्रों के अनुसार कई अधिकारियों के पद रिक्त होने से विकास कार्य बाधित हो सकते है. नागरिकों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा.
नागरिकों का कहना है कि नगरपालिका क्षेत्र में पहले से ही विकाय कार्य नियमित रूप से नहीं हो पाते है तथा कई योजनआओं का लाभ नहीं मिल पाता है. 133 करोड़ रूपये की जल परियोजना का रद्द हो जाना इसका जीवंत प्रमाण है. इसके बाद भी नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अध्यक्ष परिषद के सदस्यों पर दबाब बना कर विकास कार्य हो जाते है.
लेकिन प्रशासक की नियुक्ति के बाद ये सभी प्रभावहीन हो जायेंगे. नगरपालिका में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद कार्यपालक अधिकारी (एक्जीक्यूटीव ऑफिसर) का है. पिछले पुर्णकालिक कार्यपालक अधिकारी विद्युत साधु थे. उनका पदास्थापन आसनसोल के एक्जीक्यूटिव मेजिस्ट्रेट पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद हुआ था. परंतु उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद मुंशी जलालुद्दीन को इस पद पर अस्थायी रूप से आसीन किया गया. वे पुरुलिया जिला से आना-जाना करते थे.
कुछ समय तो उनका दौरा नियमित रूप से हुआ,लेकिन बाद में उनकी व्यस्तता बढ़ती गयी. बमुश्किल वे माह में दो या तीन दिन कार्यालय आते. कई पार्षदों की शिकायत थी कि उनसे मुलाकात करना काफी मुश्किल है.
सूत्रों के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र में मिलावट खास कर खाद्य सामग्रियों में रोकने का दायित्व हेल्थ इंस्पेक्टर का है. कई वर्षो से यह पद रिक्त पड़ा है. विकास कार्यो के लिये इंजीनियर की जरुरत पड़ती है,परंतु पूरे नपा में एक जूनियर इंजीनियर से काम लिया जाता है. आर्थिक तंगी का रोना रोने वाली पालिका का तर्क है कि उसके करदाताओं के पास करोड़ों रुपये शुल्क के रूप में अटके हैं. नगरपालिका में रेवेन्यू अधिकारी का भी पद वर्षो से रिक्त है.
फलस्वरुप राजस्व वसूली का कार्य प्रभावित होता रहा है. वजन इत्यादि की जांच करनेवाला फूड इंस्पेक्टर का पद रिक्त है. स्वास्थ्य निरिक्षक नहीं रहने के कारण 35 वार्ड में आम जनता का स्वास्थ्य राम भरोसे है. नपा में छह सीआरसी अभी है परंतु किसी के पास न ही क्लर्क है न ही कार्यालय दिया गया है. पालिका क्षेत्र में शवदाह संस्कार घाट है परंतु वहां कोई क्लर्क नहीं है.
नगरपालिका सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार को कई बार इस स्थिति से अवगत कराया गया है,लेकिन राज्य मुख्यालय से इनके पदास्थापन की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है. इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ता है.
