न मिला पीएफ, न ग्रेच्युटी

सिलीगुड़ी : रिटायर होने के कई साल बाद भी पीएफ तथा ग्रेच्युटी के पैसे नहीं मिलने से इन दिनों हिमूल के पूर्व कर्मचारियों की स्थिति काफी दयनीय है. ये सभी लोग घोर आर्थिक तंगी में हैं और इनके लिए परिवार का पालन-पोषन मुश्किल हो गया है. हिमूल रिटायर्ड इंप्लोई एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक दे […]

सिलीगुड़ी : रिटायर होने के कई साल बाद भी पीएफ तथा ग्रेच्युटी के पैसे नहीं मिलने से इन दिनों हिमूल के पूर्व कर्मचारियों की स्थिति काफी दयनीय है. ये सभी लोग घोर आर्थिक तंगी में हैं और इनके लिए परिवार का पालन-पोषन मुश्किल हो गया है. हिमूल रिटायर्ड इंप्लोई एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक दे ने उक्त आशय की जानकारी देते हुए बताया कि करीब 42 कर्मचारी वर्ष 2010 के बाद से अब तक रिटायर हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित हैं.

प्रोविडेंड फंड के साथ-साथ ग्रेच्युटी एवं लिव इनकैशमेंट के रुपये का भुगतान इन कर्मचारियों को अब तक नहीं की गई है. वह यहां सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. श्री दे ने आगे कहा कि पीएफ के पैसे मिलने की उम्मीद काफी कम है, क्योंकि पीएफ कार्यालय ने रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के आवेदन लेने बंद कर दिये हैं. पीएफ कमिश्नर का कहना है कि पीएफ मद में हिमूल ने भुगतान ही नहीं किया है. ऐसे में रिटायर कर्मचारियों को पैसे नहीं दिये जा सकते. श्री दे ने आगे कहा कि हिमूल के सभी कर्मचारियों से पीएफ के मद में वेतन से रुपये की कटौती की गई है, लेकिन इसका भुगतान पीएफ कार्यालय को नहीं किये जाने के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई है.

हिमूल के पूर्व कर्मचारियों के साथ-साथ वर्तमान कर्मचारियों के भी वेतन से पैसे काटे जा रहे हैं, लेकिन पीएफ कार्यालय में जमा नहीं किये जा रहे हैं. इस मद में हिमूल को करीब 67 लाख रुपये से भी अधिक का भुगतान पीएफ कार्यालय को करना है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए हिमूल प्रबंधन के साथ-साथ उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव से भी कई बार बातचीत की गई, लेकिन सब ने अपने हाथ खड़े कर दिये हैं. नियमानुसार यदि कोई कर्मचारी सेवा से अवकास ग्रहण करता है तो तीन महीने के अंदर पीएफ के साथ-साथ अन्य मद में मिलने वाले रुपये का भुगतान हो जाना चाहिए. लेकिन हिमूल के कर्मचारी वर्षो से अपने बकाये के भुगतान के लिए पीएफ कार्यालय तथा हिमूल का चक्कर काट रहे हैं. कहीं से किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई है.

श्री देव ने आगे बताया कि हिमूल के चेयरमैन एडीएम पी. शेर्पा हैं. उनसे भी इस समस्या के समाधान के लिए बातचीत की गई है. उन्होंने समस्या के समाधान का कोई आश्वासन नहीं दिया और राज्य सरकार से बात करने के लिए कहा है. उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि हिमूल के कर्मचारी कंपनी के चेयरमैन से बात नहीं करेंगे तो किससे करेंगे. श्री दे ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य की नयी सरकार से लोगों को काफी उम्मीदें हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हिमूल कर्मचारियों की समस्याओं को समङोंगी और इस दिशा में आवश्यक कदम उठायेंगी. संवाददाता सम्मेलन में संगठन के महासचिव आलोक मित्र तथा बीबी परियार भी उपस्थित थे.

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