सिलीगुड़ी : देश की सुरक्षा में सीआरपीएफ की भी अहम भूमिका : बलविंदर सिंह

हम हमेशा हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार जरूरत पड़ने पर सीमा पर सेना की भी सहायता करगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद किया सिलीगुड़ी : 26 जुलाई प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का दिन है. इसी दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को करगिल से खदेड़ कर युद्ध विराम की घोषणा की. […]

हम हमेशा हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार
जरूरत पड़ने पर सीमा पर सेना की भी सहायता
करगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद किया
सिलीगुड़ी : 26 जुलाई प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का दिन है. इसी दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को करगिल से खदेड़ कर युद्ध विराम की घोषणा की. करगिल में भारतीय वीर जवानों की सफलता को प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.
इसी क्रम में प्रभात खबर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के साथ मिलकर गुरूवार को सिलीगुड़ी कार्यालय में विजय दिवस का पालन किया. वर्ष 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने भारत के मुकुट कहे जाने वाले जम्मू व काश्मीर के करगिल पर डेरा जमा लिय था.
भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू कर तमाम घुसपैठियों को वहां से खदेड़ दिया. हांलाकि इस युद्ध में काफी संख्या में भारत के वीर जवान भी शहीद हुए. लेकिन दुश्मनों को खदेड़ कर विजय हासिल की भारतीय ध्वज शिखर पर लहराया. करीब तीन महीने चली इस लड़ाई की शुरूआत 3 मई 1999 को हुयी थी और 14 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय के सफल होने की घोषणा की.
इसके ठीक 12 दिन बाद भारतीय सेना ने भी ऑपरेशन विजय के सफल होने की घोषणा के साथ युद्ध विराम किया. 26 जुलाई का यह दिन भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है. वीर जवानों को याद करने के लिए ही आज सिलीगुड़ी स्थित प्रभात खबर कार्यालय में विजय दिवस का पालन किया गया. इसमें सीआरपीएफ के तमाम आला अधिकारी शामिल हुए.
ऐसे सीआरपीएफ आंतरिक सुरक्षा तो देश की करती ही है साथ ही जब भी जरूरी होता है बाहरी सुरक्षा में में भी सेना का साथ देती है.वर्ष 2001 में संसद पर हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन पराक्रम शुरू हुआ तो सीमा पर सीआरपीएफ की दस बटालियनों ने भी मोर्चा संभाला था.विजय दिवस के अवसर पर प्रभात खबर कार्यालय में उपस्थित सीआरपीएफ सिलीगुड़ी के डीआईजी (ग्रुप सेंटर)बलविंदर सिंह गुजराल ने बताया कि कारगिल युद्ध में विपरीत परिस्थिति के बावजूद भी भारतीय फौज ने दुश्मनों को लोहा मनवाया. प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई का दिन काफी सम्मानीय अवसर है. सीआरपीएफ भी देश की सुरक्षा में काफी अहम भूमिका निभाती है.
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ देश की सबसे चहेती अर्द्धसैनिक बलों में से एक है. सीमा पर भारतीय सेना की सहायता का मसला हो या फिर देश की आतंरिक सुरक्षा की जिम्मदारी, चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव, नक्सलियों से निपटना हो या फिर युद्ध के दौरान देश की आतंरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी,यह तमाम जिम्मेदारियां सीआरपीएफ को ही सौंपी जाती है. यहां तक कि प्राकृतिक आपदा जैसे भूस्खलन, बाढ़ व रेल दुर्घटना व आदि बड़ी दुर्घटनाओं में भी राहत कार्य की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को ही सौंपी जाती है.
हमें गर्व है कि सीआरपीएफ ने सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है. इसी वजह से अर्द्धसैनिक बलों में सबसे अधिक पदक भी सीआरपीएफ के पास है. देश की सुरक्षा, प्राकृतिक आपदा व घटना दुर्घटनाओं से निपटने के लिए सीआरपीएफ के पास अलग-अलग आरएफ व कोबरा जैसी बटालियन हमेशा मुस्तैद होती है. 1959 में चीन सीमांत पर भी सीआरपीएफ के 30 जवान शहीद हुए थे.
क्या कहा डिप्टी कमांडेन्ट संजय गोसाइं ने
सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेन्ट संजय गोसाइं ने भी बैंगलुरू की एक घटना का स्मरण कराते हुए सीआरपीएफ की सामाजिक जिम्मेदारी का वर्णन किया. अंत में डिप्टी कमांडेन्ट गौरव कुमार ने अपने संबोधन में बस दो शब्द जय हिंद का नारा दिया.
गोर्खालैंड आंदोलन में संयम से लिया काम : सविता
सीआरपीएफ के सेकेंड इन कमांड सुनिल कुमार सविता ने विजय दिवस के अवसर पर देश के सभी जवानों को बधाई देते हुए बताया कि सीआरपीएफ का गठन आजादी के पहले सन 1939 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ की क्राउन प्रतिनिधि पुलिस के रूप किया गया था. आजादी के बाद 28 दिसंबर 1949 को सीआरपीएफ का गठन किया गया है.
वर्तमान में सीआरपीएफ एशिया की सबसे बड़ी अर्द्धसैनिक बलों में से एक है. वर्तमान में सीआरपीएफ की कुल 246 बटालियन हैं. जिसमें 6 महिला बटालियन, 15 रैफ व 10 कोबरा बटालियन शामिल है. सीआरपीएफ ने देश की सुरक्षा से लेकर आतंरिक सुरक्षा, चुनाव आदि की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है.
चुनौती को स्वीकार कर हर लक्ष्य को पूरा कर देश को गौरवांन्वित किया है. युद्ध के समय दुश्मन देश की आतंरिक सुरक्षा घेरा को तोड़कर आवाम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर युद्ध में सीआरपीएफ ने देश की आतंरिक सुरक्षा में दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया है. बीते वर्ष अलग राज्य गोरखालैंड आंदोलन की चर्चा करते हुए कहा कि तीन महीने तक पहाड़ पर आंदोलन जारी रहा. सीआरपीएफ ने प्रतिदिन 24 घंटे काम कर भ्रमित व उग्र जनता को संभाला. सीआरपीएफ ने काफी संयम से काम लिया. अंत में आंदोलन समाप्त हुआ. गोरखालैंड आंदोलन के दौरान पहाड़ पर शांति व्यवस्था बनाने के लिए सीआरपीएफ की कुल 12 कंपनियां तैनात थीं.
बोले डीआइजी (रेंज) बलदेव सिंह
इस मौके पर सीआरपीएफ के डीआईजी (रेंज) बलदेव सिंह ने कहा कि सीआरपीएफ हर संकट की घड़ी में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़ी रही है. देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जब भी आवश्यकता हुयी है सीआरपीएफ ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है.
देश की तरक्की में भी सीआरपीएफ ने आम नागरिकों के साथ मिलकर, हर तबके से जुड़कर काम किया है. देश की सेवा में तैनात भारतीय सेना व अन्य अर्द्धसैनिकल बलों के साथ सीआरपीएफ की भूमिका भी अहम रही है.

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