कोलकाता. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन की आशा व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ राज्यों ने इसे लागू करना शुरू कर दिया है. मेघवाल ने यहां ‘आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन में भारत का प्रगतिशील पथ’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में बोलते हुए यह टिप्पणी की. मेघवाल ने रविवार को यहां कहा, “भाजपा के घोषणापत्र में हमने समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया है. गोवा और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने इसे लागू करना शुरू कर दिया है. केंद्र में जो गठबंधन सरकार बनी है, वह बहुत मजबूत सरकार है और चिंता की कोई बात नहीं है.” पिछले सप्ताह जब बीकानेर से सांसद मेघवाल ने कहा था कि समान नागरिक संहिता अब भी भाजपा के एजेंडे में है, तो राजग के घटक दल जद(यू) ने कहा था कि ऐसा कोई भी कदम सर्वसम्मति से ही उठाया जाना चाहिए.
जद(यू) नेता केसी त्यागी ने कहा था कि हालांकि पार्टी यूसीसी के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह चाहती है कि यह कदम आम सहमति से उठाया जाना चाहिए. केंद्रीय कानून मंत्री ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद कथित हिंसा की घटनाओं की आलोचना की और कहा कि केंद्र सरकार इनके प्रति सतर्क है. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद ऐसी हिंसा भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं है. मेघवाल ने कहा, “चुनाव लोकतंत्र का अहम हिस्सा है. चुनाव खत्म होने के बाद किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए. यह (बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा) हमारी जानकारी में है और केंद्र सरकार भी इसके प्रति सजग है. देश में कानून का राज है, यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में कथित राजनीतिक हिंसा की जांच के लिए शनिवार को चार सदस्यीय समिति का गठन किया. पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया.पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद नये आपराधिक कानून लागू करने का लिया गया है फैसला
केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को विपक्षी दलों के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि नये आपराधिक कानून लागू करने का फैसला लेने से पहले पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया. नये आपराधिक कानून एक जुलाई से लागू किये जायेंगे. मेघवाल ने कहा कि भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम कानून लागू किये जायेंगे. उन्होंने कहा कि नये कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम और बुनियादी ढांचे का विकास पहले से ही जारी है. मेघवाल ने रविवार को ‘आपराधिक न्याय प्रणाली प्रदान करने में भारत का प्रगतिशील मार्ग’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के दौरान कहा : समय पर, त्वरित और त्रुटिरहित न्याय प्रदान करने के लिए तीन नये कानून एक जुलाई से लागू होंगे. मेघवाल ने कहा : कुछ लोग दावा करते हैं कि उनसे परामर्श नहीं किया गया, यह गलत है. औपनिवेशिक कानूनों में बदलाव की मांग लंबे समय से चली आ रही है और यह प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो गयी थी. मंत्री ने बताया कि सभी राज्यों से सुझाव मांगे गये थे, लेकिन केवल 18 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों ने ही जवाब दिया. उन्होंने कहा : भारत के प्रधान न्यायाधीश, 16 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, पांच विधि अकादमियों और 22 विधि विश्वविद्यालयों ने भी अपने सुझाव दिये. मेघवाल ने कहा : हमने सभी सांसदों से संपर्क किया, लेकिन दोनों सदनों के केवल 142 सदस्यों ने ही जवाब दिया. देश भर के सभी विधायकों से भी सुझाव मांगे गये, लेकिन केवल 270 ने ही जवाब दिया. हमने व्यापक रूप से परामर्श किया, लेकिन सभी ने जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा : ये कानून चार वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किये गये. कोई परामर्श नहीं किये जाने के दावे झूठे हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
