मुख्य बातें
West Bengal Weather: कोलकाता: रिकार्ड वोटिंग के बाद अब बंगाल एक और रिकार्ड तोड़ने जा रहा है. बंगाल में इस साल गर्मी पिछले सौ वर्षों का रिकार्ड को तोड़ सकती है. 1877 के बाद, यानी पूरे 140 वर्षों के बाद सबसे शक्तिशाली ‘अल नीनो’ आने वाला है. मौसम वैज्ञानिक इसे ‘मेगा अल नीनो’ या ‘सुपर अल नीनो’ कह रहे हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचर और पश्चिम बंगाल का आसनसोल इस समय दुनिया के सबसे गर्म स्थानों की सूची में शीर्ष पर हैं. इन सभी शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिर रहा है.
अप्रैल में ही पारा 45 के पार पहुंचा
अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप है, जिससे तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया है. इस प्रचंड गर्मी और उमस भरी स्थिति के बीच, राज्य में चुनावी उत्साह भी रिकॉर्ड स्तर पर है, जहां पहले चरण में 93 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया है. पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जैसे इलाके अत्यधिक गर्म हैं. कोलकाता और आसपास के जिलों में तापमान 90% से अधिक आर्द्रता के साथ 101°F (38°C से अधिक) तक महसूस किया जा रहा है.
बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी
- अत्यधिक तापमान: पश्चिमी उच्चभूमि और दक्षिण बंगाल में तापमान 40-45°C से ऊपर पहुंच रहा है.
- उच्च आर्द्रता : उच्च आर्द्रता के कारण वास्तविक तापमान और भी अधिक महसूस हो रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित है.
- प्रशासनिक अलर्ट: भीषण गर्मी को देखते हुए कई जगहों पर स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं और लोगों को हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी जा रही है.
क्या 2024 का रिकॉर्ड टूटेगा
2024 भारत में 1901 से अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा. उस वर्ष दिल्ली के सफदरजंग में भीषण गर्मी 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई, जबकि राजस्थान के चूरू में 50.5 डिग्री सेल्सियस का तापमान रहा. अकेले मई महीने में ही लू के दिनों की संख्या में 125 प्रतिशत की वृद्धि हुई. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 140 वर्षों में आने वाले सबसे दुर्लभ ‘मेगा एल नीनो’ के कारण इस वर्ष 2024 का रिकॉर्ड टूट सकता है.
‘मेगा अल नीनो’ क्या है
अल नीनो तब होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का ठंडा पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. खरबों लीटर पानी के अचानक गर्म होने से वायुमंडल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे दुनिया भर के मौसम में बदलाव आता है. यह आमतौर पर 6 से 12 महीने तक रहता है. इस बार खतरा और भी अधिक है, क्योंकि प्रशांत महासागर का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की आशंका है. एक रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो मई और जुलाई के बीच सक्रिय रहेगा.
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अल नीनो का क्या पड़ेगा प्रभाव
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह अल नीनो तभी पूरी ताकत पकड़ेगा जब बंगाल में मानसून का मौसम अपने चरम पर होगा. यानी, मानसून पूरी तरह सक्रिय होना चाहिए. आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 में जब सुपर अल नीनो आया था, तब भारत में बारिश 14 प्रतिशत कम हो गई थी. इसके परिणामस्वरूप, भारत और पाकिस्तान में भीषण गर्मी की लहरों में कई लोगों की जान चली गई थी. वहीं, भारत की 50 प्रतिशत से अधिक कृषि प्रणाली सीधे मानसून पर निर्भर है. अगर इस बार बारिश सामान्य से कम होती है, तो देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है.
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