West Bengal SIR: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में SIR का काम अब अंतिम चरण में है. 28 फरवरी को चुनाव आयोग वोटरों की फाइनल लिस्ट जारी करनेवाला है. पश्चिम बंगाल में इस बार 50 लाख से अधिक वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर किये जाने की बात कही जा रही है. हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वहां हुए SIR में 48 लाख वोटरों के नाम काटे गए थे. अब पश्चिम बंगाल में भी बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका है. आंकड़ों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 68 लाख (लगभग 9%) तक की गिरावट आ सकती है.
पूरी प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार
- 16 दिसंबर 2024: राज्य की ड्राफ्ट SIR लिस्ट जारी की गई, जिसमें करीब 7.1 करोड़ मतदाता दर्ज थे.
- प्रारंभिक कटौती: ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान ही लगभग 58 लाख नाम हटाए गए (कारण: अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट).
- अतिरिक्त कटौती: अंतिम सूची में करीब 10.4 लाख और नाम हटने का अनुमान है.
- 21 फरवरी 2025: दस्तावेजों की जांच और मामलों के निस्तारण की अंतिम तिथि.
- 28 फरवरी 2025: संशोधित अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन.
SIR लिस्ट में करीब 7.1 करोड़ मतदाता दर्ज
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16 दिसंबर को जारी राज्य की ड्राफ्ट SIR लिस्ट में करीब 7.1 करोड़ मतदाता दर्ज थे. इस सूची से लगभग 58 लाख ऐसे वोटर्स के नाम हटाए गए थे, जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट पाए गए. टाइम्स ऑफ इंडिया ने भारत निर्वाचन आयोग के सूत्रों के हवावे से बताया कि अब करीब 10 लाख और नाम हटाए जाने की तैयारी है.
डेढ़ करोड़ वोटर्स के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्राफ्ट सूची में करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ियां पाई गईं या वे ‘अनमैप्ड’ चिह्नित किए गए थे. इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया. इनमें से करीब 3.6 लाख मतदाताओं को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नोटिस ही नहीं दे पाए, क्योंकि वे उन्हें ढूंढ नहीं सके. अधिकारी के अनुसार- इन 3.6 लाख मतदाताओं के नाम सीधे अंतिम सूची से हटा दिए जाएंगे. इसके अलावा, करीब 5.2 लाख मतदाताओं को सुनवाई का नोटिस मिला, लेकिन वे शनिवार दोपहर 2 बजे तक ईआरओ या एईआरओ के सामने पेश नहीं हुए. उनके नाम भी हटाए जाएंगे.
- अनुपस्थित मतदाता: लगभग 3.6 लाख मतदाताओं को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नोटिस तक नहीं दे पाए, क्योंकि वे अपने पते पर नहीं मिले। इनके नाम सीधे हटाए जाएंगे.
- सुनवाई में अनुपस्थिति: करीब 5.2 लाख मतदाता नोटिस मिलने के बावजूद निर्धारित समय तक ईआरओ (ERO) के सामने पेश नहीं हुए.
- दस्तावेजी विफलता: व्यक्तिगत सुनवाई के बाद जांच के चरण में 1.6 लाख और वोटर ‘अयोग्य’ पाए गए.
फाइनल वोटर लिस्ट में घट जाएंगे 10.4 लाख नाम
सुनवाई के बाद दस्तावेज़ों की जांच के चरण में करीब 1.6 लाख और नाम ‘अयोग्य’ पाए गए. इस तरह अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या कम से कम 10.4 लाख और घटने की बात कही जा रही है. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विशेष रोल पर्यवेक्षकों और जिलाधिकारियों के साथ शुक्रवार को हुई बैठक में आयोग ने कुछ गंभीर गड़बड़ियों की ओर भी ध्यान दिलाया. अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में सिस्टम पर अखबार की कतरनें, खाली पन्ने या साफ नजर न आने वाली तस्वीरें अपलोड कर दी गई थीं और उन्हें सत्यापित भी कर दिया गया था. ऐसे 15-20 मामलों को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया गया. इन सभी की सुपर-चेकिंग के दौरान दोबारा जांच होगी, जिससे अयोग्य मतदाताओं की संख्या और बढ़ सकती है.
- फर्जी सत्यापन: कई मामलों में सत्यापन के नाम पर सिस्टम पर खाली पन्ने, अखबार की कतरनें या धुंधली तस्वीरें अपलोड कर दी गई थीं।
- सुपर-चेकिंग: आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संदिग्ध मामलों की दोबारा जांच (Super-checking) की जाएगी, जिससे अयोग्य मतदाताओं की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
28 फरवरी को जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट
इस बीच, 16 दिसंबर से 19 जनवरी के बीच नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 और 6A के तहत करीब 7.4 लाख आवेदन मिले. इसके अलावा, मौत या पता बदलने के कारण नाम हटाने के लिए 42,501 फॉर्म-7 जमा किए गए. वोटर आईडी में सुधार या छोटे बदलावों के लिए 3.4 लाख से ज्यादा फॉर्म-8 भी आए हैं. आयोग का कहना है कि अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी आवेदनों का निपटारा कर लिया जाएगा. निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुनवाई के दौरान जमा दस्तावेजों की जांच और मामलों का निस्तारण 21 फरवरी तक पूरा करना है. इसके बाद 25 फरवरी तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा और तीन दिन बाद, यानी 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.
- फॉर्म-6 और 6A: नए मतदाता बनने के लिए लगभग 7.4 लाख आवेदन प्राप्त हुए।
- फॉर्म-7: नाम हटाने (मृत्यु या पता बदलने) के लिए 42,501 आवेदन।
- फॉर्म-8: सुधार या बदलाव के लिए 3.4 लाख से अधिक आवेदन।
SIR का टीएमसी कर रही विरोध
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एसआईआर का लगातार विरोध करती रही हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जा सकते हैं. टीएमसी का कहना है कि SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं खासकर गरीब, प्रवासी मजदूर, अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. पार्टी का आरोप है कि ये लोग दस्तावेज़ या सुनवाई में समय पर पहुंचने में सक्षम नहीं होते, जिससे उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है.
- वंचितों पर प्रहार: टीएमसी का आरोप है कि इस अभियान का सबसे ज्यादा असर गरीबों, प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों पर पड़ रहा है, जो अक्सर दस्तावेजी साक्ष्य देने या सुनवाई में शामिल होने की स्थिति में नहीं होते.
- वोटिंग अधिकार का हनन: पार्टी को डर है कि इस प्रक्रिया के बहाने वैध मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से काट दिए जाएंगे.
2021 के विधानसभा चुनावों के आंकड़े
| विवरण | आंकड़े |
| कुल सीटें | 294 |
| TMC की जीत (2021) | 215 सीटें |
| BJP की जीत (2021) | 77 सीटें |
| 5000 से कम अंतर वाली सीटें | 35 सीटें |
इन 35 ‘क्लोज कॉन्टेस्ट’ सीटों में से भाजपा ने 22 और तृणमूल ने 12 सीटें जीती थीं. टीएमसी को अंदेशा है कि यदि इन क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में मामूली बदलाव भी हुआ, तो आगामी चुनावों के परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं.
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