धर्म के आधार पर इलाज से किया इंकार?

एक सात महीने की गर्भवती मुस्लिम महिला को सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर इलाज से कथित रूप से इनकार कर दिया गया.

कोलकाता. डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है, लेकिन कोलकाता में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ पर धार्मिक भेदभाव का गंभीर आरोप लगा है. सोशल मीडिया पर 25 अप्रैल को वायरल हुई एक पोस्ट के अनुसार, एक सात महीने की गर्भवती मुस्लिम महिला को सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर इलाज से कथित रूप से इनकार कर दिया गया. पोस्ट को महफूजा खातून नाम की वकील ने साझा किया, जो पीड़ित महिला की भाभी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ सीके सरकार, जो संतोषपुर की कस्तूरी दास मेमोरियल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़ी हैं, ने महिला को यह कहकर इलाज से मना कर दिया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद मैं मुस्लिम मरीजों को नहीं देख रही हूं. इतना ही नहीं, कथित रूप से डॉक्टर ने आपत्तिजनक और उग्र भाषा का भी प्रयोग किया, जिससे गर्भवती महिला मानसिक रूप से आहत हो गयी. गौरतलब है कि पीड़िता डॉ सरकार की नियमित मरीज थीं और गर्भावस्था की शुरुआत से ही उनके देखरेख में थीं. घटना के बाद महिला को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उसकी स्थिति सामान्य है. इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया. कई लोगों ने डॉक्टर के व्यवहार की निंदा करते हुए प्रदर्शन और बहिष्कार की मांग की है. हालांकि अभी तक डॉक्टर या अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. महफूजा खातून का सवाल है : क्या डॉक्टर का धर्म के आधार पर मरीजों में भेदभाव करना मानवीय या नैतिक है? यह मामला चिकित्सा पेशे की नैतिकता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. सरकारी और चिकित्सा संस्थानों से मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की जा रही है.

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By GANESH MAHTO

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