कोलकाता.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नाम हटाये जाने के खिलाफ मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने व हिंसा मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआइए) ने तेज कर दी है. एजेंसी अब इस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों से सीधे पूछताछ की तैयारी में है. साथ ही, घटना में प्रभावित न्यायिक अधिकारियों से भी संपर्क किया गया है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक तस्वीर सामने लायी जा सके.बताया जा रहा है कि शुक्रवार को देर रात तक मोथाबाड़ी और कालियाचक इलाके में एनआइए अधिकारियों की टीम ने जांच जारी रखी. इसके अगले दिन यानी शनिवार को भी तफ्तीश का सिलसिला जारी रहा. इस दिन केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम इंग्लिशबाजार थाना इलाके भी जांच के लिए पहुंची. अधिकारियों ने थाने में जब्त किये गये सीसीटीवी फुटेज को खंगाले जाने का सिलसिला जारी है और कई प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की गयी. टीम को तीन हिस्सों में बांट कर बीडीओ ऑफिस, घटनास्थल और थाने में अलग-अलग स्तर पर जांच की गयी. जांच एजेंसी का फोकस अब यह समझने पर है कि भीड़ कैसे जुटी, किसने नेतृत्व किया और न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखने जैसी गंभीर घटना कैसे हुई. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि बचाव कार्य में देरी क्यों हुई और उस दौरान प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाये गये.गौरतलब है कि एसआइआर के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान सात न्यायिक अधिकारी, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को घंटों तक बीडीओ कार्यालय में घेरकर रखा गया था. उन्हें बाद में सुरक्षित निकाला गया, लेकिन रास्ते में भी हमले की शिकायत सामने आयी. मामले के मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम भी गिरफ्त में आ चुका है. जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे संगठित नेटवर्क या सुनियोजित साजिश हो सकती है. एजेंसी को जल्द ही अपनी प्राथमिक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी है. अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित न्यायिक अधिकारियों के बयान इस मामले में बेहद अहम होंगे. इनके आधार पर घटना की पूरी श्रृंखला, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और संभावित साजिश के पहलुओं को जोड़ा जायेगा. फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन प्रशासन की नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है.
