मुख्य बातें
Suvendu Adhikari: कोलकाता/ मध्यमग्राम: बुधवार रात अपने सहायक की मृत्यु की खबर मिलते ही शुभेंदु अधिकारी तुरंत मध्यमग्राम पहुंचे. गुरुवार की सुबह पोस्टमार्टम के बाद जब शव को बाहर निकाला गया, तब भी शुभेंदु वहां मौजूद थे. उनके साथ भाजपा के दो अन्य सांसद और अन्य नेता भी थे. पत्रकारों से बात करते हुए शुभेंदु ने दावा किया कि अगर वो भवानीपुर से नहीं जीते होते, तो चंद्रनाथ की इस तरह हत्या नहीं होती. शुभेंदु ने कहा कि ‘चंद्रनाथ की मृत्यु’ उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है. शुभेंदु ने कहा- चंद्रनाथ अगर भवानीपुर में मेरी मदद न की होती तो शायद चंद्रनाथ को जाना न पड़ता.
सुपारी कीलर ने मारी गोली
शुभेंदु का दावा है कि हत्या की योजना निर्मम तरीके से बनाई गई थी और इसके लिए एक सुपारी कीलर को किराए पर लिया गया था. उन्होंने कहा-विपक्षी नेता के सरकारी कार्यकारी सहायक को गोली मार दी गई. उन्होंने वायुसेना में 10 साल सेवा की थी. अब मुझे लगता है कि सदन के लोग सोच रहे होंगे कि अगर मैंने मदद न की होती, अगर भवानीपुर में मुख्यमंत्री पद से मेरी हार न हुई होती, तो 38 वर्षीय युवक को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़ती. उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि वह शुभेंदु अधिकारी का करीबी सहयोगी थे.
हर आदमी पीड़ित परिवार के साथ
शुभेंदु ने छाती का रेखाचित्र बनाकर मृत्यु की पुष्टि की. उन्होंने कहा- पिछले तीन-चार दिनों से रेकी करने के दौरान जिस तरह से उसके शरीर में पांच गोलियां भेदी गईं और जिस तरह से उसकी छाती का रेखाचित्र बनाकर उसकी मृत्यु की पुष्टि की गई, उस पर अपनी निंदा या शोक व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. शुभेंदु ने यह भी कहा कि अमित शाह से लेकर नितिन नवीन तक सभी बुधवार से चंद्रनाथ के परिवार के साथ खड़े हैं. यहां तक कि अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है.
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चंद्रनाथ की कोई राजनीतिक पहचान नहीं .
शुभेंदु के अनुसार, चंद्रनाथ का किसी भी पार्टी से सीधा संबंध नहीं है. उन्होंने मंच पर कभी किसी पर हमला नहीं किया है. हालांकि, चंद्रनाथ की मां भाजपा की नेता रही हैं. शुभेंदु ने बताया कि सीआईडी और एसआईटी इस मामले की जांच करेंगी. डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता ने आश्वासन दिया है कि जांच में काफी प्रगति हो चुकी है. घटनास्थल से चार किलोमीटर दूर एक संदिग्ध बाइक बरामद की गई है. हालांकि अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है.
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