मुख्य बात
Suvendu Adhikari: कोलकाता: पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में ओबीसी सूची पर बड़ा फैसला लिया गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ओबीसी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन करते हुए शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ओबीसी सूची में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है.
नगर मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ओबीसी सूची पर पुनर्विचार किया जाएगा.
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अग्निमित्र ने क्या कहा
सोमवार को नबन्ना में कैबिनेट बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्निमित्रा ने कई फैसलों की घोषणा की. उन्होंने कहा-पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन नौकरियों और पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाएगा. राज्य सरकार उप-वर्गीकरण को समाप्त करके ओबीसी सूची में संशोधन करेगी. मंत्री ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा 22 मई, 2024 को दिए गए निर्देशों के अनुसार सूची में संशोधन किया जाएगा. मंत्री ने आगे कहा- राज्य सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों में उल्लिखित सभी समूहों को शामिल करने के संबंध में निर्णय लेगी.
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने क्या दिया है आदेश
वामपंथी युग के अंत से लेकर तृणमूल युग के प्रारंभ तक, राज्य सरकार ने कुल 77 समुदायों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया था. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2024 में उस निर्णय को पलट दिया. तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने तब सर्वोच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया. उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई. न्यायालय ने तर्क दिया कि इन सभी समुदायों को धर्म के आधार पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में सूचीबद्ध किया गया था. अदालत के आदेश के अनुसार, 2010 से जारी किए गए लगभग 5 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए.
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