सांस के मरीजों की संख्या में उछाल

दिवाली, रोशनी का त्योहार. यह भारत में सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, लेकिन अब यह वायु और ध्वनि प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बन गया है.

दीपावली के बाद बढ़ा प्रदूषण का कहर, हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंची

संवाददाता, कोलकाता

दिवाली, रोशनी का त्योहार. यह भारत में सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, लेकिन अब यह वायु और ध्वनि प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बन गया है. दीपावली के दौरान जम कर हुई आतिशबाजी व पटाखों के कारण गंभीर स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां उत्पन्न हुई हैं. इस वर्ष भी दिवाली के तुरंत बाद कुछ ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है. शहर के अस्पतालों में श्वसन संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गयी है.

दमदम स्थित आईएलएस अस्पताल के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ मृण्मय मित्रा ने बताया कि हमने दिवाली के बाद फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ने के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 10-15% और श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए ओपीडी में आने वालों की संख्या में लगभग 20% की वृद्धि देखी है.

मुख्य लक्षण: अधिकांश रोगियों में अस्थमा का बढ़ना, लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और नाक बंद होने जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं. आंकड़ों में वृद्धि: डॉ. मित्रा ने बताया कि आमतौर पर दीपावली के बाद 50-100 रोगी हमारे पास आते थे, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या 25-50 होती थी. दिवाली अस्थमा, सीओपीडी या आईएलडी जैसी पुरानी फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण समय होता है, क्योंकि पटाखों, धुएं और धुंध के कारण वायु गुणवत्ता में अचानक गिरावट गंभीर श्वसन संकट पैदा कर सकती है.

””एक्यूआइ”” 200 के पार, जहरीली हवा मुख्य कारण : टेक्नो इंडिया डामा अस्पताल की वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सौम्या सेनगुप्ता और चिकित्सा अधीक्षक डॉ एमएस पुरकैत ने बताया कि दिवाली के बाद वायु प्रदूषण फिर से खतरनाक हो गया है. कोलकाता के कई स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 200 से अधिक हो गया है.

प्रमुख प्रदूषक : पटाखों के जलने से पीएम 2.5 और एसओ2 जैसी जहरीली गैसें प्रमुख प्रदूषक पायी गयी हैं.

डॉक्टरों की सलाह

डॉ मित्रा ने सलाह दी है कि हम सभी को, खासकर पहले से श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को, दिवाली के बाद अब बाहर मास्क पहनना चाहिए. इसके अलावा-

पटाखों के संपर्क में आने से बचें. नियमित इनहेलर, दवाएं लेते रहें. कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अपने पल्मोनोलॉजिस्ट से परामर्श लें.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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