कवच लगने के फायदे
इससे रेलवे दुर्घटनाओं में कमी आयेगी ट्रेनों के परिचालन दक्षता में सुधार होगाट्रेन की स्पीड स्वत: नियंत्रित की जा सकेगीट्रेन परिचालन में समय पालन सुनिश्चित होगासंवाददाता, कोलकाता
राजस्थान में कोटा रेल मंडल के सवाई माधोपुर स्टेशन से इंद्रगढ़ सुमेरगंजमंडी स्टेशन के बीच मंगलवार को रेलवे के अत्याधुनिक दुर्घटना रोधी प्रणाली कवच 4.0 का सफल परीक्षण (ट्रायल रन) किया गया. 108 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर अत्याधुनिक स्वचालित सुरक्षा कवच 4.0 सिस्टम को लॉन्च किये जाने के दौरान रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव खुद मौजूद रहे. इस दौरान रेलमंत्री ने ट्रेन में सफर किया. ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी और लाल बत्ती आते ही ट्रेन अपने आप रुक गयी. कवच 4.0 के सफल ट्रायल के बाद रेलमंत्री ने रेलवे अधिकारियों और इंजीनियरों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि कवच 4.0 के तहत लोको पायलट अपनी कैबिन से 10 किलोमीटर दूर तक का सिग्नल देख सकते हैं. अगर ट्रेन रेड सिग्नल के पास पहुंच रही है और ड्राइवर ध्यान नहीं दे रहा है, तो कवच अपने आप ब्रेक लगा देगा.राजस्थान में 108 किलोमीटर लंबे रेल खंड के अत्याधुनिक स्वचालित सुरक्षा कवच 4.0 सिस्टम से लैस होने से इस सेक्शन में रेल हादसों में कमी आयेगी और यात्रियों की सुरक्षा में बढ़ोतरी होगी. कवच सिस्टम पूरी तरह से भारत में विकसित ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है. इससे लोको पायलट के ब्रेक लगाने में फेल होने की स्थिति में ऑटोमेटिक रूप से ब्रेक लग जाता है. खराब मौसम के दौरान ट्रेन को सुरक्षित रूप से चलाने में भी यह तकनीक मददगार है.
रेल मंत्री ने कहा कि कवच सिस्टम को बारिश, पहाड़ी इलाकों, तटीय इलाकों के अनुरूप विकसित किया गया है. अगले 5-6 सालों में पूरा नेटवर्क कवच से कवर हो जायेगा. कवच 4.0 की शुरुआत भारत में पहली बार सवाई माधोपुर से हुई है. इस क्षेत्र में कवच लगाने का काम पूरा हो चुका है. यह तो बस शुरुआत है. आने वाले वर्षों में 10 हजार इंजनों को कवच से कवर किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि मई 2022 में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेल इंजनों को सुरक्षा कवच से लैस करने की पहल की थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
