कोलकाता. निगम के बजट सत्र के दूसरे दिन तारक सिंह ने चर्चा में सदन को संबोधित करते हुए बताया कि महानगर में सीवरेज व ड्रेनेज सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है. कोलकाता निकासी व्यवस्था दुरुस्त किये जाने के लिए 144 वार्ड में से 46 वर्डों का डिजिटल मैप तैयार किया गया है. यहीं कोलकाता सात हजार बस्तियों में से 66 बस्तियों का भा डिजिटल मैप तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि हम हमारी गंगी नदी को दूषित नहीं करना चाहते है.
उन्होंने बताया कि कोलकाता के ड्रेनेज का 25 फीसदी पानी गंगा में डाल दी जाती है, जबकि 75 फीसदी वाटर विद्याधरी नदी में प्रवाहित कर दी जाती है.पर आने वाले दिनों में हम एक बूंद पानी भी गंगा में नहीं डालेंगे. क्योंकि ड्रेनेज के पानी की रिसाइकिलिंग की जायेगी. इसके लिए निगम के खड़गपुर आईआईटी विभाग को कार्यभार सौंपा है.कोलकाता में निगम के 82 ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन
उन्होंने बताया कि कोलकाता में निगम का 82 ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन है. इन सभी पंपिंग स्टेशनों के गंदे पानी का रिसाइकिल कर इसका उपयोग बागवानी, पेड़ों पर जल छिड़काव, सड़कों की धुलाई जैसे कार्यों के लिए किया जायेगा. उन्होंने बताया कि इस परियोजना के सफल रहने पर हम पेयजल की बर्बादी को भी रोक सकेंगे, क्योंकि लोक पीने वाले पानी से ही गाड़ियों की धुलाई भी करते हैं. श्री सिंह ने कहा कि सीवरेज के पानी को वैज्ञानिक तरीके से फिल्टर किया जायेगा, ताकि उसका उपयोग बागवानी सह अन्य कार्यों के लिए किया जा सके.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
