कालियाचक घटना पर बंगाल पुलिस ने सौंपी रिपोर्ट, कोर्ट के सामने आये कई खुलासे

Kaliachak: मोथाबारी पुलिस स्टेशन ने शुक्रवार को कालियाचक घटना पर अदालत में रिपोर्ट दाखिल की. ​​रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वहां मौजूद सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया.

Kaliachak: मालदा: मोथाबारी पुलिस स्टेशन ने कालियाचक मामले में अदालत को रिपोर्ट सौंपी है. रिपोर्ट में कई सनसनीखेज खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि बीडीओ के काफिले पर कार्यालय से निकलते ही हमला किया गया. न सिर्फ जज के काफिले पर, बल्कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर भी हमला हुआ. ​रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वहां मौजूद सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया. जब केंद्रीय बल उन्हें बचाने के लिए मौके पर पहुंचे, तो उन पर भी हमला किया गया.

तीन केंद्रीय बल के जवान घायल

रिपोर्ट के अनुसार, जब न्यायाधीशों का काफिला बीडीओ कार्यालय से निकला, तो सीआरपीएफ जवान की गाड़ी पर भी हमला किया गया. उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया गया. इस घटना में एक चालक घायल हो गया. सीआरपीएफ का एक सब-इंस्पेक्टर भी घायल हो गया. इसके अलावा, एक अधीनस्थ कर्मचारी भी घायल हुआ. पुलिस रिपोर्ट में कुल मिलाकर दो से तीन केंद्रीय बलों पर हमले का जिक्र है.

उकसाए जाने के कारण हुई घटना

पुलिस रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि यह हमला बीडीओ कार्यालय के सामने इकट्ठा होने के लिए उकसाए जाने के कारण हुआ. एक अप्रैल की शाम को लगभग 100 अज्ञात लोग बीडीओ कार्यालय के सामने जमा हुए. उन्होंने काफिले को घेर लिया और उस पर ईंटों से हमला किया. हालांकि, चुनाव से पहले राज्य में केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद, यह सवाल उठ रहा है कि वे 100 अज्ञात लोग कहां से आए थे.

एनआईए जांच का फैसला सही

इस संदर्भ में सिउरी से भाजपा उम्मीदवार जगन्नाथ चटर्जी ने कहा-राज्य की स्थिति को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सही है. एनआईए जांच कर रही है. आज साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में कानून व्यवस्था बिल्कुल नहीं है. चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल पुलिस पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए. तभी पश्चिम बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकेंगे.

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न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र

कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश देबाशीष कर गुप्ता ने कहा- न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र है. उनसे निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है. ऐसे में, वैध मतदाता, जिनके पास सही दस्तावेज हैं, उन्हें न्याय मिलेगा. इसलिए, न्यायाधीशों को डराना-धमकाना, उन पर हमले करना केवल उन्हीं लोगों द्वारा किया जा सकता है, जिनके पास सही दस्तावेज नहीं हैं. यही लोग अराजकता फैलाते हैं. मुझे उम्मीद है कि आम जनता और राजनीतिक दल इन सभी दुर्भावनापूर्ण तत्वों को रोकेंगे.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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