विस चुनाव में तृणमूल-भाजपा के लिए अस्तित्व की लड़ाई

राज्य विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है. मौजूदा सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच दो-पक्षीय मुकाबले का रूप ले रहा है. इस मुकाबले में वामपंथी और कांग्रेस हाशिये पर चले गये हैं. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा तृणमूल के सहयोगी के तौर पर दार्जिलिंग की तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहा है.

कोलकाता

. राज्य विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है. मौजूदा सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच दो-पक्षीय मुकाबले का रूप ले रहा है. इस मुकाबले में वामपंथी और कांग्रेस हाशिये पर चले गये हैं. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा तृणमूल के सहयोगी के तौर पर दार्जिलिंग की तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहा है.

सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए तृणमूल ने उतारे कई नये चेहरे : तृणमूल कंग्रेस जो तीन बार से सत्ता में है, ने सत्ता-विरोधी लहर से बचने और मैदान में नये चेहरों को उतारने के लिए 74 मौजूदा विधायकों को बदल दिया है. 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने 48.02% वोट शेयर के साथ 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने 38% वोट शेयर के साथ 77 सीटें हासिल की थी. यह 2016 के मुकाबले से एक बड़ी छलांग थी, जब भाजपा को सिर्फ तीन सीटें और 10.2% वोट शेयर मिला था.

एसआइआर बना बड़ा मुद्दा : 2026 के चुनाव की तैयारी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर से जुड़े विवादों की वजह से प्रभावित हुई है. पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची, जो 28 फरवरी को जारी की गयी थी, में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गयी है. इस सूची से 62 लाख से ज्यादा नाम हटा दिये गये थे. चुनाव प्रचार जोरों पर होने के बावजूद 60 लाख और नाम अभी भी जांच के दायरे में है. न्यायिक अधिकारियों में इसमें 32 लाख का निपटारा किया है. अब तक की जानकारी के मुताबिक इसमें 40 फीसदी नाम कटने की संभावना है. इससे राज्य में एक अभूतपूर्व अनिश्चितता का माहौल बन गया है. एसआइआर को लेकर चल रहे इस टकराव ने अन्य सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है. तृणमूल इस मुद्दे को हथियार बना कर मैदान में उतरी है. मुख्यमंत्री की सभाओं में ज्यादातर बातें एसआइआर पर हो रही है. इसी के बहाने वह भाजपा पर जमकर हमला भी कर रही हैं. हालांकि भाजपा इसे राज्य के लोगों के हित में बता रही है. भाजपा का कहना है कि इससे घुसपैठिये को बाहर का रास्ता दिखाने का अवसर मिलेगा. कई अहम मुद्दे चुनावी माहौल में बेअसर हो गये हैं.

भाजपा ने बनाया अभया की मां को उम्मीदवार

2024 में आरजी कर अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने ममता सरकार पर जनता के भरोसे को हिलाकर रख दिया था. इंसाफ की मांग पर राज्य भर में तेज आंदोलन हुए. रात दखल तक का आयोजन हुआ. लेकिन ट्रेनी डॉक्टर अभया के परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक इंसाफ नहीं मिला है. इसलिए अभया की मां रत्ना देवनाथ इस पर उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी से सीट से भाजपा की उम्मीदवार बनी हैं.

मुस्लिम वोट पर भी रहेगी नजर : वहीं वामपंथी दल कुछ चुनिंदा सीटों पर उनका वोट शेयर, अगर मुकाबला कड़ा हुआ, तो जीत-हार के अंतर को प्रभावित कर सकता है. उनका आइएसएफ के साथ कुछ सीटों पर समझौता हुआ है. इस बार मुस्लिम वोटों पर सबकी नजरें टिकी हैं.

भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी हैं आमने-सामने

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, भवानीपुर में भाजपा उम्मीदवार नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. भवानीपुर से ही सीएम मौजूदा विधायक भी हैं. 2021 में तृणमूल के दोबारा सत्ता में आने के बावजूद ममता बनर्जी नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों के अंतर से हार गयी थीं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव प्रचार की इस लंबी अवधि में राज्य में कुछ चौंकाने वाले नतीजे भी देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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