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Mamata Banerjee Bhabanipur News| कोलकाता, शिव कुमार राउत : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में सबसे चौंकाने वाला खुलासा भवानीपुर सीट से हुआ है. इस सीट को तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य किला और ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता था. यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है.
वार्ड 73 ने ‘कमल’ पर जताया भरोसा
हार का सबसे कड़वा घूंट यह रहा कि बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी अपने ही गृह वार्ड (वार्ड संख्या 73) में पिछड़ गयीं. शुभेंदु अधिकारी की आक्रामक चुनावी रणनीति और हिंदुत्व के कार्ड ने भवानीपुर के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया. जिस गढ़ से ममता आसानी से जीत की उम्मीद कर रहीं थीं, वहां की जनता ने इस बार भाजपा के ‘कमल’ पर भरोसा जताया.
8 में से 7 वार्डों में बीजेपी को बढ़त
भवानीपुर विधानसभा के अंतर्गत कोलकाता नगर निगम के कुल 8 वार्ड (63, 70, 71, 72, 73, 74, 77 और 82) आते हैं. नतीजों के विश्लेषण से पता चला है कि मुख्यमंत्री का आवास वार्ड 73 में है. यहां भी तृणमूल को बढ़त नहीं मिल सकी. वर्ष 2014 के बाद से ही यहां भाजपा लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही थी. इन 8 में से 7 वार्डों में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा. वार्ड 63 और 72 जैसे क्षेत्रों में जहां गुजराती, राजस्थानी और मारवाड़ी मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां भाजपा का प्रभाव निर्णायक साबित हुआ.
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शुभेंदु की घेराबंदी, हिंदुत्व और आक्रामक प्रचार
भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर को जीतने के लिए विशेष ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया था. नामांकन से लेकर आखिरी दिन के प्रचार तक, शुभेंदु ने हिंदुत्व की बात की. उन्हें भवानीपुर के हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में सफलता मिली. शुभेंदु ने सीधे तौर पर उन वार्डों को निशाना बनाया, जहां भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में आगे रही थी.
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ममता बनर्जी का SIR का डर और साजिश की आशंका
चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने अपने बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ सीक्रेट मीटिंग की थी, जिसके विवरण अब सामने आ रहे हैं. ममता ने वार्ड 63 और 72 में SIR प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और हर घर तक पहुंचने का निर्देश दिया था. उन्हें डर था कि इन हिंदू बहुल क्षेत्रों में भाजपा बड़ी बढ़त ले सकती है.
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Mamata Banerjee Bhabanipur: वार्ड 77 की चिंता और 45 हजार नामों की कटौती
अल्पसंख्यक बहुल वार्ड 77 को लेकर ममता ने आशंका जतायी थी कि वहां से ‘जान-बूझकर’ मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं. SIR के दौरान भवानीपुर से करीब 45 हजार नाम हटाये गये थे. हालांकि, इनमें से अधिकतर मृत मतदाता थे. तृणमूल इसे ही अपनी हार की एक बड़ी वजह मान रही है.
