भाजपा की आयोग से तीन पुलिस अफसरों को हटाने की मांग
भाजपा ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर कोलकाता पुलिस के तीन अधिकारियों को हटाने की मांग की है. भाजपा का आरोप है कि ये अधिकारी निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जाना चाहिए.
By BIJAY KUMAR | Updated at :
कोलकाता.
भाजपा ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर कोलकाता पुलिस के तीन अधिकारियों को हटाने की मांग की है. भाजपा का आरोप है कि ये अधिकारी निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जाना चाहिए. भाजपा ने अपने पत्र में कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास, इंस्पेक्टर (आइसी) बी राउत और सब-इंस्पेक्टर राहुल अमीन अली शाह के नाम का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन अधिकारियों की मौजूदगी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है. पार्टी का कहना है कि चुनाव से पहले इन अधिकारियों को हटाना बेहद जरूरी है, ताकि मतदान प्रक्रिया पर किसी तरह का असर न पड़े. पत्र में भाजपा ने यह भी दावा किया है कि एक वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें ये अधिकारी पश्चिम बंगाल पुलिस वेलफेयर कमेटी के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने की अपील करते नजर आ रहे हैं. भाजपा का आरोप है कि इस तरह का आचरण चुनाव आचार संहिता के खिलाफ है और यह अधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है. भाजपा ने यह भी बताया कि इन आरोपों को लेकर पहले भी चुनाव आयोग से शिकायत की जा चुकी है. इससे पहले नौ मार्च 2026 और 22 मार्च 2026 को लिखित रूप में शिकायत दर्ज करायी गयी थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसके अलावा, पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस समय शांतनु सिन्हा विश्वास का कूचबिहार से चुनाव खत्म होने के बाद ट्रांसफर कर दिया गया था, जिससे यह सुनिश्चित किया गया था कि वे मतदान वाले क्षेत्र में तैनात न रहें. भाजपा ने अपने पत्र में जोर देकर कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाये रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों का निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है. खासकर कानून-व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने चुनाव आयोग से अपील की है कि बिना किसी देरी के उचित कदम उठाये जायें और संबंधित अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित किया जाये, ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित किया जा सके.