खास बातें
Lakshmir Bhandar Latest Update: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद करोड़ों महिलाओं के मन में एक ही सवाल था कि क्या ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना बंद हो जायेगी? इस सस्पेंस पर अब विराम लग गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नयी भाजपा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की महिलाओं को आर्थिक मदद देने वाली यह फ्लैगशिप योजना न केवल जारी रहेगी, बल्कि इसे नये कलेवर और बढ़ी हुई राशि के साथ लागू किया जा सकता है. भाजपा का मानना है कि जनहित की योजनाओं का नाम बदल सकता है, लेकिन लाभ बंद नहीं होना चाहिए.
क्यों बंद नहीं होगी लक्ष्मी भंडार?
- महिला वोट बैंक : बंगाल चुनाव में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया है. लक्ष्मी भंडार के जरिये राज्य की करोड़ों महिलाएं सीधे तौर पर लाभान्वित हो रही हैं. भाजपा इस बड़े वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती.
- अन्नपूर्णा भंडार की ओर कदम : भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ का वादा किया था. लक्ष्मी भंडार को इसी योजना में मर्ज (विलय) किया जा सकता है, जिसमें आर्थिक सहायता की राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपए तक किया जा सकता है.
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नाम बदलेगा, पर काम नहीं रुकेगा
भाजपा सरकार की रणनीति इस योजना को ‘मोदी की गारंटी’ से जोड़ने की है.
- वित्तीय पारदर्शिता : नयी सरकार का आरोप रहा है कि पिछली सरकार में इन योजनाओं में लीकेज थी. अब इसे सीधे डीबीटी (DBT) के जरिये और भी पारदर्शी बनाया जायेगा, ताकि बिचौलिये खत्म हो सकें.
- आयुष्मान भारत के साथ जुड़ाव : लक्ष्मी भंडार के लाभार्थियों को केंद्र की ‘आयुष्मान भारत’ योजना से भी जोड़ने की तैयारी है, जिससे महिलाओं को नकद राशि के साथ-साथ मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिले.
- संकल्प की सिद्धि : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिये हैं कि उनकी सरकार किसी भी लोक-कल्याणकारी कार्य को बाधित नहीं करेगी, बल्कि उसे केंद्र की योजनाओं के साथ एकीकृत (Integrate) कर अधिक प्रभावी बनायेगी.
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Lakshmir Bhandar: विपक्ष के आरोपों पर पलटवार
तृणमूल कांग्रेस लगातार प्रचार कर रही थी कि भाजपा सत्ता में आते ही लक्ष्मी भंडार बंद कर देगी. अब भाजपा के इस रुख ने विपक्ष के उस बड़े हथियार को कुंद कर दिया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि वे ‘रंग’ और ‘नाम’ की राजनीति की बजाय ‘विकास’ और ‘सशक्तिकरण’ पर ध्यान दे रहे हैं.
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