कुम्हारटोली में थमा मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण, मिट्टी सिंडिकेट पर हंटर से हाहाकार, सड़कों पर उतरे मूर्तिकार

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 09 Jun 2026 9:31 PM

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कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शन करते कुम्हारटोली के शिल्पकार.

Kumartuli Artisans Protest: पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा अवैध खनन पर की गयी सख्ती के बाद कोलकाता के कुम्हारटोली में विशेष दोमट मिट्टी की भारी किल्लत हो गयी है. मूर्तिकारों ने मिट्टी आपूर्ति बहाल करने के लिए मार्च किया और नबान्न में सरकार को ज्ञापन सौंपा.

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Kumartuli Artisans Protest: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 के महा-उत्सव में अब कुछ ही महीने शेष हैं. अमूमन इस सीजन में कोलकाता का सदियों पुराना और विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकला हब कुम्हारटोली (Kumartuli) चौबीसों घंटे गूंजता रहता था, लेकिन इस साल वहां अजीब-सी खामोशी और मायूसी है. शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा अवैध खनन और मिट्टी माफियाओं के खिलाफ शुरू किये गये ताबड़तोड़ एक्शन ने अनजाने में बंगाल की सबसे बड़ी पूजा पर अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है.

दोमट मिट्टी की आपूर्ति ठप

हुगली नदी के तटों (विशेषकर डायमंड हार्बर) से आने वाली विशेष दोमट मिट्टी (Riverine Clay) की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण अधर में लटक गया है. पर्यावरण बचाने की प्रशासनिक मुहिम के चलते पीढ़ियों से बिना औपचारिक लाइसेंस के मिट्टी निकालने वाले गरीब पारंपरिक सप्लायर खौफ के मारे भूमिगत हो गये हैं. इसलिए आस्था की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का पहिया बीच मझधार में ही जाम हो गया है.

रामलीला मैदान से केएमसी तक महा-रैली

संकट की गंभीरता इतनी बढ़ चुकी है कि सोमवार को कुम्हारोटील के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ दृश्य देखने को मिला. मिट्टी के औजार पकड़ने वाले हाथ विरोध के बैनर थामे सड़कों पर उतर आये. शिल्पकारों के दो संगठनों की अगुवाई में सैकड़ों मूर्तिकारों और शिल्पकारों ने कोलकाता के रामलीला मैदान से कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय तक विरोध मार्च निकाला.

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नबान्न में सौंपा ज्ञापन

दिग्गज मूर्तिकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सनातन रुद्रपाल के नेतृत्व में शिल्पकारों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ पहुंचा. उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस गतिरोध को तुरंत दूर करने और मिट्टी की आपूर्ति को कानूनी रूप से सुचारु करने की गुहार लगायी. इसके अलावा इस दल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता से भी मुलाकात कर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की.

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‘मिट्टी माफिया’ पर एक्शन बनाम ‘कुम्हारटोली का दर्द’

  • कुम्हारटोली के मूर्तिकारों का कहना है कि वे सरकार की अवैध खनन रोकने की मंशा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये अचानक उठाये गये इस कदम ने उनका काम ठप कर दिया है.
  • शिल्पकारों का आरोप है कि तृणमूल सरकार ने नदी के किनारों पर सक्रिय बड़े सॉइल माफिया (Soil Mafia) के खिलाफ कभी कोई एक्शन नहीं लिया. नयी सरकार के आते ही पुलिस और प्रशासन ने डायमंड हार्बर और अन्य तटीय क्षेत्रों में मिट्टी के उठाव पर पूरी तरह अघोषित प्रतिबंध लगा दिया है.
  • सरकार ने नियम कड़े करते हुए केवल लाइसेंस धारकों को ही मिट्टी निकालने की अनुमति दी है. कुम्हारटोली के बड़े सप्लायर अशोक पाल और महादेव पाल ने बताया कि मिट्टी लाने वाले ट्रक ड्राइवरों और कलेक्टरों में इस कदर खौफ है कि बिना लिखित परमिट के कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं है.
  • प्रशासन ने कुम्हारटोली के मूर्तिकारों के नाम पर अन्यत्र होने वाली मिट्टी की कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़े नियम बनाये हैं, लेकिन इसकी मार सीधे प्रतिमा का निर्माण करने वाले कलाकारों पर पड़ रही है.

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खराब हो रहे तैयार ढांचे

  • कुम्हारटोली के प्रसिद्ध मूर्तिकार मिंटू पाल और पशुपति रुद्र पाल ने बताया कि प्रतिमाओं के पुआल और लकड़ी के अंदरूनी ढांचे बनकर तैयार हैं, लेकिन बिना मिट्टी के लेप के इन्हें लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता. नमी के कारण पुआल सड़कर गिर सकता है.
  • शिल्पकारों ने स्थानीय स्तर पर गंगा की मिट्टी की परत चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वह सूखने पर चटक जाती है और उतनी मजबूत नहीं होती, जितनी डायमंड हार्बर की विशेष मिट्टी होती है. इस वजह से उन्हें पूरा काम नये सिरे से शुरू करना होगा, जिससे मूर्तियों की निर्माण लागत और अंतिम कीमतें आसमान छूने लगेंगी.

Kumartuli Artisans Protest: दिहाड़ी मजदूरों पर संकट

राज्य के विभिन्न ग्रामीण जिलों से हजारों दिहाड़ी मजदूर और कारीगर कुम्हारटोली पहुंच चुके हैं. मूर्तिकार इंद्रनील पाल ने कहा कि जो लोग हर साल इस सीजन में रोजी-रोटी के लिए यहां आते हैं, उन्हें हम काम न होने पर वापस नहीं भेज सकते, लेकिन मिट्टी न होने से हम उन्हें एडवांस और दिहाड़ी कहां से देंगे?

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बाजार से गायब हुए कुल्हड़, चाय की दुकानों पर भी मचा हाहाकार

मिट्टी की इस किल्लत का असर सिर्फ भव्य पंडालों की मूर्तियों तक ही सीमित नहीं है, इसने कोलकाता की रोजमर्रा की लाइफलाइन को भी प्रभावित किया है. मिट्टी की आपूर्ति रुकने से कुम्हारों के चाक भी बंद हैं. बाजार से मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़ गायब हो गये हैं. चूंकि राज्य में सिंगल-यूज प्लास्टिक कप पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, इसलिए दुकानदारों को मजबूरन महंगे पेपर कप का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक मुनाफा प्रभावित हुआ है.

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने दिया आश्वासन

राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे ने तूल पकड़ा, तो नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आश्वासन दिया कि सरकार पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए कुम्हारटोली के शिल्पकारों के लिए पारदर्शी और विशेष सिंगल-विंडो मिट्टी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम कर रही है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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