मुख्यमंत्री आमंत्रित करतीं, तो मैं भी दीघा जाता: विकास रंजन

उन्होंने कि आरएसएस की जो नीति है, उससे बाहर जाकर घोष ने कुछ नहीं किया है.

कोलकाता. दीघा में जगन्नाथ धाम के उद्घाटन के मौके पर सपत्नीक दिलीप घोष के जाने पर विवाद अभी थमा नहीं है. इसी बीच, माकपा नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने भाजपा के नेता दिलीप घोष का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री उन्हें आमंत्रित करतीं, तो वह भी जरूर जाते. उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाना ठीक नहीं. उन्होंने कि आरएसएस की जो नीति है, उससे बाहर जाकर घोष ने कुछ नहीं किया है. घोष की पार्टी के लोग जो आज विरोध कर रहे हैं, कुछ दिन बाद वे भी समर्थन करेंगे. उनका कहना था कि आरएसएस के जितने कार्यक्रम हैं, वे बंगाल में ही लागू हो रहे हैं. सरकारी पैसे से मंदिर बनाया गया. यह तो संविधान से दगाबाजी है. दिलीप घोष का जाने का मतलब यही है कि आरएसएस की विचारधारा लागू हो रही है.

बता दें कि दिलीप घोष ने भी दावा किया है कि ममता बनर्जी को भी मंदिर की राजनीति में उतरना पड़ा है. इसमें जीत किसकी है. यह भाजपा की ही बड़ी जीत है. जीत को छिनने के लिए ही वह गये थे और छीन कर ही लौटे हैं. विकास रंजन ने कहा कि ज्योति बसु व विधान चंद्र राय के संपर्क को लेकर बहुत सारी बातें लोगों ने सुनी है. प्रमोद दासगुप्ता की स्मरण सभा में प्रफुल्ल सेन ने जो बातें कही थीं, उससे हम सभी को सबक लेने की जरूरत है. उन्होंने कहा था कि प्रमोद दासगुप्ता हर रोज शाम को फोन कर उनकी सेहत की जानकारी लेते, जबकि दिन भर वह मेरे खिलाफ बहुत सारी बातें कहते रहते थे.

उन्होंंने कहा कि प्रमोद दासगुप्ता एक कोट पहने थे. प्रफुल्ल सेन ने उनसे इस बारे में पूछा, तो दो दिन बाद उन्होंने खुद एक कोट ले जाकर सेन को दे दिया. विकास रंजन के मुताबिक उनके व्यक्तिगत संबंध क्यों खराब रहेंगे. एक कट्टर वामपंथी थे, तो दूसरे कट्टर दक्षिणपंथी. जो लोग राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत विरोध के रूप में देखते हैं, वे सभ्यता के खिलाफ है. दिलीप घोष ने कोई अन्याय नहीं किया है.

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Published by: Ganesh mahto

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