चुनावी ड्यूटी में चिकित्सकों की तैनाती पर विवाद

राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के एक फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. आयोग ने डॉक्टरों को भी चुनाव ड्यूटी में तैनात करने का निर्देश दिया है. हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज को भेजे गये पत्र में चिकित्सकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

कोलकाता.

राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के एक फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. आयोग ने डॉक्टरों को भी चुनाव ड्यूटी में तैनात करने का निर्देश दिया है. हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज को भेजे गये पत्र में चिकित्सकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराये गये या नौकरी से हटाये गये शिक्षकों को किसी भी हालत में चुनाव ड्यूटी में शामिल नहीं किया जायेगा.

स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं. राज्य के सरकारी अस्पताल पहले से ही मरीजों के भारी दबाव में काम कर रहे हैं. कई मेडिकल कॉलेज, जिला और अनुमंडल अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों की कमी है. ऐसे में चिकित्सकों का मानना है कि चुनावी ड्यूटी का अतिरिक्त बोझ स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. हालांकि, आयोग का कहना है कि सभी नियुक्तियां तय प्रोटोकॉल के अनुसार ही की जा रही हैं.

नौकरी गंवा चुके शिक्षकों को भी जारी हुए आदेश : कुछ मामलों में ऐसे शिक्षकों को भी चुनाव ड्यूटी के आदेश जारी कर दिये गये, जिनकी नौकरी पहले ही जा चुकी है. इस पर आयोग ने सफाई दी कि यह गलती पुराने डाटाबेस के कारण हुई है और इसे तुरंत ठीक किया जा रहा है. आयोग ने यह भी निर्देश दिया था कि संविदा कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में शामिल न किया जाये, लेकिन कुछ जगहों पर इसके उल्लंघन के आरोप सामने आये हैं. पूर्व मेदिनीपुर में ऐसे ही एक मामले के बाद संबंधित जिलाधिकारी का तबादला कर दिया गया है.

49 वरिष्ठ डॉक्टरों को मिला ड्यूटी आदेश

आरामबाग के प्रफुल्ल चंद्र सेन सरकारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 49 डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी के आदेश जारी किये गये हैं. इनमें विभिन्न विभागों के चिकित्सक और सहायक प्रोफेसर शामिल हैं. चुनावी तैयारियों के बीच आयोग के इस फैसले ने बहस को और तेज कर दिया है.

पंचायत चुनाव में भी जारी हुआ था निर्देश

चिकित्सक संगठनों के अनुसार, 2023 के पंचायत चुनाव में भी डॉक्टरों को पीठासीन अधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया था. उस समय विरोध के बाद प्रशासन को निर्णय में बदलाव करना पड़ा था.

आयोग ने शुरू की निर्देश वापसी की प्रक्रिया : चिकित्सक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर आदेश रद्द करने की मांग की है. उनका दावा है कि दबाव के चलते इस बार भी निर्देश वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. उन्होंने राज्य के अधिकारियों पर मनमाने तरीके से डॉक्टरों की तैनाती का आरोप लगाया है.

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा असर : चिकित्सकों का कहना है कि उनका प्राथमिक दायित्व मरीजों का इलाज करना है. यदि वे चुनावी ड्यूटी में लगेंगे, तो स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होंगी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य सरकारी कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो डॉक्टरों को ही क्यों लगाया जा रहा है.

आयोग को लिखा जायेगा पत्र : सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जतायी है. संगठन का कहना है कि राज्य में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है और ऐसे में इस तरह के निर्देश उचित नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग को पत्र लिखकर डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की जायेगी.

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By Bijay kumar

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