जूट की बजाय प्लास्टिक को बढ़ावा देने पर संकट में किसान व मजदूर : ऋतब्रत

इसे उन्होंने वस्त्र मंत्रालय की पिछले दो वर्षों की नीतिगत विफलताओं का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया.

तृणमूल सांसद ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री को फिर लिखा पत्र

कोलकाता. केंद्र सरकार द्वारा जूट के स्थान पर प्लास्टिक बैग के उपयोग को प्राथमिकता देने के फैसले पर तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को फिर से पत्र लिखकर आरएमएस 2026-27 सत्र में खाद्यान्न संग्रह के लिए बड़े पैमाने पर एचडीपीई और पीपी प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल की अनुमति देने के निर्णय को जूट उद्योग के खिलाफ बताया. पत्र में सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों और भारतीय खाद्य निगम के लिए करीब 9.22 लाख बेल प्लास्टिक बैग का आवंटन कर जान-बूझकर जूट उत्पादों की सुनिश्चित मांग को कमजोर किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब जूट उद्योग पहले से ही गंभीर संकट से गुजर रहा है. इसे उन्होंने वस्त्र मंत्रालय की पिछले दो वर्षों की नीतिगत विफलताओं का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया.

जूट की कथित कमी के तर्क को खारिज करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह कमी प्राकृतिक नहीं, बल्कि नीतिगत लापरवाही का नतीजा है.

उन्होंने लिखा कि जब कीमतें कम थीं, तब बफर स्टॉक नहीं बनाया गया और अब कीमतें बढ़ने पर जूट को ही हटा दिया गया.

उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले का सीधा असर किसानों और मजदूरों पर पड़ रहा है. कमजोर एमएसपी व्यवस्था के कारण पहले ही कम कीमत पर जूट बेचने को मजबूर किसान अब अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं. वहीं, जूट मिलों में मांग घटने से लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गयी है. सांसद ने इसे गंभीर पर्यावरणीय विरोधाभास बताते हुए कहा कि सरकार एक ओर सिंगल यूज प्लास्टिक कम करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नवीकरणीय और जैविक जूट के स्थान पर पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक को बढ़ावा दे रही है.

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Author: GANESH MAHTO

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