समन छोड़ दिल्ली भागे अभिषेक बनर्जी, ममता के आवास पहुंची सीआईडी, ‘साइन-गेट’ में बुरे फंसे टीएमसी के नंबर-2 नेता
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 09 Jun 2026 9:39 PM
ममता बनर्जी के आवास के बाहर सीआईडी की टीम.
CID at Mamata Banerjee Residence: फर्जी हस्ताक्षर विवाद (Signgate) में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा समन छोड़ दिल्ली जाने के बाद सीआईडी की टीम सीधे ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पहुंची. सीआईडी ने उन्हें तीसरा समन जारी किया है.
खास बातें
CID at Mamata Banerjee Residence: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद बगावत का तूफान ममता बनर्जी के घर की चौखट तक पहुंच गया है. विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर वाले संगीन मामले (Signature Forgery Case) की जांच कर रही राज्य की आपराधिक जांच शाखा (CID) की हाई-प्रोफाइल टीम कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आधिकारिक आवास पहुंची. यह कार्रवाई तब हुई, जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) सीआईडी के समन पर हाजिर होने की दिल्ली चले गये.
24 घंटे के अल्टीमेटम वाला समन
सीआईडी अब अभिषेक बनर्जी को और अधिक समय देने के मूड में बिल्कुल नहीं है. यही वजह है कि सोमवार देर रात उनके कालीघाट स्थित घर पर तीसरा और अंतिम ‘24 घंटे का अल्टीमेटम’ वाला समन तामील करा दिया है, जिसने टीएमसी के बचे-कुचे खेमे में भारी दहशत पैदा कर दी है.
क्या वो ‘साइन-गेट’ घोटाला?
इस पूरे कानूनी और राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत बेहद गोपनीय दस्तावेज के फर्जीवाड़े से जुड़ी है. इसकी पूरी क्रोनोलॉजी चौंकाने वाली है.
- विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद 19 मई 2026 को तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा सचिवालय को एक आधिकारिक प्रस्ताव पत्र सौंपा था. इस पत्र के जरिये वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) मनोनीत करने की मांग की गयी थी.
- इस विवाद में अभिषेक बनर्जी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने खुद राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला यह आधिकारिक पत्र विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को फॉरवर्ड (अग्रसारित) किया था.
- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बागी गुट के प्रमुख रीतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस पत्र में 10 से अधिक विधायकों के नाम केवल ब्लॉक लेटर्स (अंग्रेजी के बड़े अक्षरों) में लिखे गये थे. विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई जांच के दौरान अरूप रॉय, बहारुल इस्लाम और सुभाशीष दास सहित 3 बागी विधायकों ने सीआईडी के सामने ऑन-कैमरा बयान दिया कि इस पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं.
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सीआईडी की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश?
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 1 जून को पहली बार भवानी भवन (मुख्यालय) में हाजिर होने का समन भेजा था. तब अभिषेक ने ‘खराब स्वास्थ्य’ का हवाला देकर 2 सप्ताह का समय मांगा था. इसके बाद उन्हें 8 जून (सोमवार) को हाजिर होने का दूसरा समन मिला. जांच में सहयोग की बजाय वह शनिवार शाम को ही दिल्ली चले गये. सोमवार को ममता बनर्जी के साथ दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में शामिल हुए.
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बीमारी का बहाना और राजनीति में सक्रियता
अभिषेक के इस रवैये से सीआईडी अधिकारी नाराज हैं. उनका कहना है कि व्यक्ति खुद को बीमार बताकर जांच में शामिल होने से इनकार कर रहा है, वह दिल्ली में राजनीतिक बैठकों में पूरी तरह सक्रिय है. इसके बाद सीआईडी की टीम सीधे हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके ‘शांतिनिकेतन’ आवास और कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के घर पहुंची और तीसरा नोटिस थमा दिया.
CID at Mamata Banerjee Residence: पूरी तरह अलग-थलग पड़े बुआ-भतीजे
अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किलें केवल सीआईडी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि केंद्र और राज्य की सभी एजेंसियों ने एक साथ उनके खिलाफ चक्रव्यूह तैयार कर दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोलकाता पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर सालों से लगे वीआईपी पुलिस कियोस्क, बख्तरबंद गाड़ियां, स्कैनर मशीनें और सुरक्षा घेरे को पूरी तरह से हटा दिया था.
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प्रवर्तन निदेशालय ने भी भेजा समन
अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी केस के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा (No Coercive Action) की गुहार लगायी, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले (Primary Teachers Recruitment Scam) में उन्हें नया समन जारी कर 15 जून को कोलकाता जोनल ऑफिस में तलब कर लिया.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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